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होगा सुधार : अगले सत्र से सभी विभागों में परफॉर्मेंस के आधार पर होंगे ओपन ट्रांसफर

Fri, 05 Jul 2019 12:50 PM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ - फोटो : amar ujala
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सरकारी कामकाज में सुधार की ओर बड़ा कदम उठाते हुए प्रदेश सरकार परफॉर्मेंस को तबादले की कसौटी बनाने जा रही है। अगले स्थानान्तरण सत्र से सभी विभागों में परफॉर्मेंस आधारित ओपन ट्रांसफर ही होंगे। प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री एसपी गोयल ने मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में इस संबंध में तैयारी के आदेश जारी कर दिए हैं।  
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प्रदेश के ग्राम्य विकास विभाग में परफॉर्मेंस इंडीकेटर तय कर खुले सत्र में सभी के सामने रिक्त पदों पर तबादले की व्यवस्था लागू की गई। विभाग की इस पहल की काफी तारीफ हुई। मुख्यमंत्री ने कैबिनेट की बैठक में इस प्रणाली का प्रेजेंटेशन कराया और दूसरे विभागों को भी ग्राम्य विकास की तरह तबादले करने का सुझाव दिया था। 

इसके बावजूद ज्यादातर विभागों ने इस ओर रुचि नहीं दिखाई और पुरानी व्यवस्था में ही तबादले कर डाले। इसी बीच स्वास्थ्य विभाग के तबादले जांच का विषय बन गए और वित्त विभाग के तबादला प्रस्ताव स्पष्ट न होने की वजह से मुख्यमंत्री ने लौटा दिया।
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अब मुख्यमंत्री ने इस सत्र के तबादले की अवधि बीतने के बाद नए सत्र में पारदर्शी तबादले की व्यवस्था की तैयारी अभी से करने के निर्देश दे दिए हैं। प्रमुख सचिव ने मुख्यमंत्री के निर्देशों का हवाला देते हुए अधिकारियों से कहा है कि वे दो महीने के भीतर कर्मियों के परफॉर्मेंस इंडीकेटर तय कर लें। 

इसके बाद अपने-अपने स्तर पर प्रस्तावित प्रणाली का परीक्षण कर लें। इससे अगले स्थानांतरण सत्र 2020 में सभी तबादले परफॉर्मेंस के आधार पर पारदर्शी तरीके  से किए जा सकेंगे। इस व्यवस्था को प्रभावी तरीके से लागू कराने के लिए मुख्य सचिव से कहा गया है।
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नियुक्ति व गृह विभाग को छूट

प्रस्तावित परफॉर्मेंस आधारित ओपन ट्रांसफर प्रणाली से नियुक्ति व गृह विभाग को छूट रहेगी। नियुक्ति विभाग आईएएस व पीसीएस अधिकारियों के तबादले करता है जबकि गृह विभाग से आईपीएस व पीपीएस अफसरों के तबादले किए जाते हैं। 

आईएएस व पीसीएस के तबादलों का प्रस्ताव मुख्य सचिव की अध्यक्षता में सिविल सर्विसेज बोर्ड तैयार करता है और मुख्यमंत्री मंजूरी देते हैं। इसी तरह आईपीएस व पीपीएस तबादले का प्रस्ताव डीजीपी की अध्यक्षता वाली कमेटी तैयार करती है और प्रमुख सचिव गृह के जरिए मुख्यमंत्री की मंजूरी ली जाती है। 
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