इसके बाद कंपनी अगले पांच वर्ष में रीजनल प्लान के मुताबिक परियोजनाओं को चिह्नित करते हुए उनकी डीपीआर तैयार करेगी। साथ ही धरातल पर परियोजनाएं शुरू कराने का काम भी सुनिश्चित कराएगी। एससीआर में लखनऊ, सीतापुर, उन्नाव, हरदोई, बाराबंकी और रायबरेली जनपद शामिल हैं। इसका क्षेत्रफल लगभग 26,000 वर्ग किलोमीटर है।
आसपास के जनपदों को भी विकसित किया जाएगा
कंसल्टेंट कंपनी ने सर्वे रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि अन्य जनपदों की तुलना में लखनऊ अधिक विकसित है। आसपास के जनपदों से रोजाना हजारों लोग व्यवसाय, नौकरी, स्वास्थ्य, शिक्षा व अन्य कारणों से लखनऊ आते हैं। एससीआर के क्रम में आसपास के जनपदों का भी समानांतर रूप से विकास किया जाएगा।
इससे निवेश बढ़ेगा, रोजगार व व्यवसाय के अवसर सृजित होंगे। गांवों तक शहरी सुविधाएं पहुंचेंगी और लोगों को उनके क्षेत्र में ही निवास, व्यापार व नौकरी आदि के लिए बेहतर माहौल मिलेगा। साथ ही जनपदों के बीच हाई स्पीड कनेक्टिविटी का प्रावधान करने से पलायन में कमी आएगी। प्रजेंटेशन के मौके पर विधान परिषद सदस्य मुकेश शर्मा, मुख्य नगर नियोजक केके गौतम, मुख्य अभियंता नवनीत शर्मा प्रमुख रूप से मौजूद थे।
सांसद प्रतिनिधि ने कहा...बाराबंकी व उन्नाव के लिए भी बनाया जाए प्लाट
प्रस्तुति के दौरान सांसद राजनाथ सिंह के प्रतिनिधि दिवाकर त्रिपाठी ने कहा कि लखनऊ का विकास शहरीकरण की वजह से हुआ। इसी तरह बाराबंकी व उन्नाव आदि जनपदों में भी शहरीकरण के लिए विस्तृत प्लान तैयार कराने की जरूरत है। इन जनपदों में पेयजल एवं विद्युत की कितनी खपत है, आबादी के अनुपात में स्वास्थ्य, शिक्षा व अन्य मूलभूत सुविधाओं का क्या दायरा है?
उन्होंने कहा कि इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए कार्ययोजना बनानी होगी। वर्तमान में लगभग 16 करोड़ पर्यटक अयोध्या आ रहे हैं। इन्हें लखनऊ व एससीआर के अन्य जनपदों से कैसे जोड़ा जाए, इसके लिए भी विस्तृत योजना तैयार की जाए। इसके अलावा सीतापुर व हरदोई रोड पर कृषि आधारित उद्योगों का हब विकसित करने के लिए रूपरेखा तैयार की जाए।
आवागमन के साधन होंगे बेहतर... बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
एलडीए उपाध्यक्ष ने बताया कि लखनऊ, सीतापुर, उन्नाव, हरदोई, बाराबंकी और रायबरेली में आधारभूत सुविधाओं को उच्चीकृत करने पर काम किया जा रहा है। इस क्रम में जनपदों के बीच हाई स्पीड रेल एवं रोड कनेक्टिविटी का प्रावधान किया जा रहा है। आवागमन तेज और सुगम होने से औद्योगिक व व्यावसायिक विकास को बल मिलेगा। इससे बड़ी तादाद में रोजगार के अवसर सृजित होंगे और प्रदेश का आर्थिक विकास होगा।