सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो छोटे मकान वालों को मुफ्त पानी दिया जाएगा, बशर्ते इनकी एनुअल रेंटल वैल्यू (एआरवी) 360 रुपये तक होनी चाहिए।
पहले चरण में यह व्यवस्था नौ शहरों लखनऊ, इलाहाबाद, वाराणसी, मेरठ, कानपुर, आगरा, सहारनपुर, गोरखपुर व मथुरा में लागू होगी। इन शहरों में सभी घरों में मीटर लगाते हुए खर्च के आधार पर वाटर टैक्स की वसूली की जाएगी।
इन जिलों के निकाय अधिकारी जल्द ही स्थानीय निकाय निदेशालय को प्रस्ताव उपलब्ध कराएंगे।
जवाहर लाल नेहरू अरबन रिन्युएबल मिशन (जेएनएनयूआरएम) योजना के तहत काम होने वाले शहरों में लोगों को 24 घंटे जलापूर्ति के साथ उनसे जल मूल्य के आधार पर वाटर टैक्स लेने की व्यवस्था की गई है।
इसके लिए सभी घरों में वाटर मीटर अनिवार्य रूप से लगाए जाएंगे। प्रदेश में वर्ष 2009 से घरों में वाटर मीटर लगाने की कवायद चल रही है।
मीटर लगने के साथ ही 90 फीसदी घरों से वाटर टैक्स की वसूली और 360 रुपये एआरवी वाले मकानों को वाटर टैक्स से छूट दी जानी है।
सचिव नगर विकास श्रीप्रकाश सिंह ने पिछले दिनों वाटर मीटर लगाने और वाटर टैक्स के दरों में बढ़ोतरी संबंधी प्रस्ताव पर चर्चा के लिए अधिकारियों को बुलाया था।
इसमें महाप्रबंधक जल संस्थान इलाहाबाद व सहारनपुर ने बताया कि इन शहरों में वाटर कनेक्शन की संख्या 50 से 60 फीसदी ही है।
सचिव नगर विकास ने निर्देश दिया कि शहरों में अवैध रूप से चल रहे कनेक्शनों को वैध करने का अभियान चलाने के साथ ही और संशोधित प्रस्ताव स्थानीय निकाय निदेशालय को जल्द उपलब्ध कराएं।
इलेक्ट्रॉनिक डाटा कलेक्शन प्रणाली लागू होगी
सचिव नगर विकास ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वाटर टैक्स वसूली के लिए हैंड बिलिंग युक्त रिमोट इलेक्ट्रॉनिक डाटा कलेक्शन व्यवस्था लागू की जाए। उन्होंने कहा कि वाटर टैक्स की वसूली अनिवार्य की जाए जिससे जल संस्थानों की स्थिति में सुधार आए।