सड़क हादसे में जख्मी, गरीब व लावारिस मरीजों को शुरूआती इलाज के लिए रुपए अड़गा नहीं लगा पाएगा। रुपए न होने की स्थिति में उनका इलाज नहीं प्रभावित होगा। मरीजों का इमरजेंसी में पंजीकरण होने संग केजीएमयू आईटी सेल के वर्चुअल खाते में पांच हजार रुपए दिए जाएंगे। जिसके जरिए मरीज की खून समेत अन्य जांच हो पाएगी।
केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर में हर रोज करीब 250-300 मरीज इलाज के लिए आते हैं। इसमें कई गरीब मरीज, लावारिस व हादसे में जख्मी लोग आते हैें। पुलिस जरिए उन्हें लाने पर भर्ती कराया जाता है। इसके बाद उनके इलाज की जिम्मेदारी केजीएमयू की बन जाती है ताकि मरीजों को प्राथमिक उपचार देकर उनकी जान बचाई जा सके। रुपए न होने की स्थिति में मरीज की जांचें नहीं हो पाती थी। इससे इलाज की दिशा तय नहीं होती थी। डॉक्टरों के हस्ताक्षर पर मरीजों का मुफ्त जांच होती थी।
इसे देखते हुए केजीएमयू प्रशासन ने मरीजों के हित में फैसला लिया है। मरीजों को इलाज में किसी भी तरह की दिक्कत न होने के लिए पंजीकरण के तुरंत बाद पांच हजार रुपये खाते में डाल दिए जाते हैं। इस रकम से गरीब मरीज का शुरुआत में इलाज शुरू हो रहा है। जांच से लेकर इलाज दवाओं तक की परेशानी नहीं आती है। सीएमएस डॉ. एसएन शंखवार के मुताबिक, गरीब मरीजों को पहले से मुफ्त इलाज की व्यवस्था थी। मरीजों को शुरूआती इलाज आसानी से मिल सके इसलिए यह व्यवस्था शुरू की गई है। मरीज के यूएचआईडी नंबर पर पैसे डाल दिए जाते हैं।