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UP: इंस्पेक्टर के भाई को डिजिटल अरेस्ट रख वसूले एक लाख, ठगों ने मनी लान्ड्रिंग में दोषी बताकर झांसे में लिया

Sat, 13 Sep 2025 06:21 PM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

लखनऊ में जालसाजों ने इंस्पेक्टर के भाई को डिजिटल अरेस्ट रखकर एक लाख रुपये ऐंठ लिए। ठगों ने मनी लान्ड्रिंग में दोषी बताकर उसे झांसे में लिया। आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज पुलिस जांच में जुटी है। 
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साइबर अपराधियों ने किया डिजिटल अरेस्ट। - फोटो : social media
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विस्तार
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राजधानी लखनऊ में साइबर जालसाजों ने पुलिस अधिकारी बनकर कृष्णानगर के कृष्णापल्ली निवासी इंस्पेक्टर के भाई विनय कुमार गुप्ता को चार घंटे डिजिटल अरेस्ट रखकर एक लाख रुपये वसूल लिए। ठगों ने उन्हें मनी लान्ड्रिंग मामले में दोषी बताया। पीड़ित ने कृष्णानगर थाने में जालसाजों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है।

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विनय के भाई विजय बीएसएफ में इंस्पेक्टर हैं। विनय के मुताबिक 25 अगस्त को सुबह 9.00 बजे उनके पास अनजान नंबर से व्हाट्सएप ऑडियो कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को टेलीकॉम विभाग का कर्मी सुरेश कुमार बताया। उसने कहा कि तुम्हारा सिम दो घंटे बाद बंद हो जाएगा। कारण पूछने पर उसने बताया कि तुम्हारी आईडी से दिल्ली में बीते 20 मार्च को सिम खरीदा गया है। 

इस नंबर से कई आपराधिक गतिविधियां हुई हैं। दिल्ली के थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। वहां से सिम बंद करने का आदेश मिला है। सुरेश ने पीड़ित से पुलिस से बात कर एनओसी लेने की बात कही और कॉल काट दी। कुछ देर बाद पीड़ित के पास फिर व्हाट्सएप वीडियो कॉल आई। फोन कर्ता ने खुद को दिल्ली पुलिस का अफसर सुनील कुमार बताया और अपना आईडी कार्ड दिखाया।

60 केस दर्ज होने की कही बात

ठग ने पीड़ित से कहा कि तुम्हारे खिलाफ मनी लान्ड्रिंग और धोखाधड़ी के 60 मामले दर्ज हैं। मोबाइल भी सर्विलांस पर लगा है। यह सुन विनय घबरा गए। उन्हें परेशान देख फर्जी अफसर ने पूछताछ और ऑनलाइन बयान दर्ज कराने के बहाने डिजिटल अरेस्ट कर लिया। आरोपी ने पूछताछ के बारे में किसी को न बताने की बात कही। बात न मानने पर गिरफ्तारी का डर दिखाया।

जांच के बहाने मांगी रकम

करीब चार घंटे तक प्रताड़ित करने के बाद साइबर जालसाज ने पीड़ित से कहा तुम्हारे खाते में जो रकम है उसे मेरे अकाउंट में ट्रांसफर कर दो। रकम की आरबीआई जांच करेगी। जांच पूरी होने पर दो दिन बाद तुम्हें रकम लौटा दी जाएगी। मानसिक प्रताड़ित हो चुके पीड़ित ने ठग की बात मान ली और उसके खाते में दो लाख ट्रांसफर कर दिए। फिर ठग ने मोबाइल स्विच ऑफ कर लिया। 

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दो दिन बाद जब विनय को रकम नहीं मिली तो उन्होंने भाई विजय कुमार को जानकारी दी। तब उन्हें ठगी की जानकारी हुई। काफी दिनों तक झिझक के कारण पीड़ित ने थाने में शिकायत नहीं की। घरवालों के समझाने पर वह शुक्रवार को कृष्णानगर थाने पहुंचे। इंस्पेक्टर पीके सिंह के मुताबिक जिन नंबरों से कॉल की गई। जिस खाते में रकम ट्रांसफर की गई उसका ब्योरा निकाला जा रहा है।

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