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Lucknow News: तकनीकी सहयोग के नाम पर फर्जी प्लान भी बेचते थे ठग

Sun, 19 Jul 2026 02:35 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
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लखनऊ। फर्जी कॉल सेंटर खोलकर अमेरिकी नागरिकों से 150 करोड़ से अधिक की ठगी करने वाला गिरोह तकनीकी सहयोग के नाम पर फर्जी प्लान भी बेचता था। इसके लिए अलग-अलग टैरिफ बनाए गए थे। तीन माह के लिए 49, छह माह के लिए 89 और एक साल के लिए 129 डॉलर लिए जाते थे। यही नहीं अमेरिका में मौजूद ठग पीड़ितों के घर जाकर भी रकम वसूलते थे।
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एडीसीपी क्राइम किरन यादव के मुताबिक जांच में सामने आया है कि अमेरिका में सक्रिय साइबर अपराधी वहां के नागरिकों के कंप्यूटर पर फर्जी वायरस पॉप-अप और सुरक्षा अलर्ट दिखाते थे। ये संदेश माइक्रोसॉफ्ट विंडोज या अन्य प्रतिष्ठित एंटीवायरस सॉफ्टवेयर के वास्तविक संदेशों जैसे दिखते थे। पॉप-अप में कंप्यूटर को वायरस से संक्रमित बताकर तकनीकी सहायता के लिए टोल-फ्री नंबर पर कॉल करने को कहा जाता था। इसके बाद मनोवैज्ञानिक दबाव बना लोगों को झांसे में लेकर उनसे ठगी की जाती थी।
अभियान चलाकर आज भवनों की होगी जांच
संयुक्त पुलिस आयुक्त कानून व्यवस्था बबलू कुमार का कहना है कि भवनों को किराये पर लेकर साइबर क्राइम की घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है। ऐसे में रविवार को अभियान चलाकर अपार्टमेंट और व्यावसायिक भवनों की जांच की जाएगी। इसका सत्यापन लखनऊ पुलिस की वेबसाइट के माध्यम से किया जाएगा। सभी थाना प्रभारियों को निर्देशित किया गया है। बता दें कि सुशांत गोल्फ सिटी स्थित ओमेक्स आर-2 और समिट बिल्डिंग में फर्जी कॉल सेंटर के मामले सामने आए हैं।
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सतर्क रहें, ऐसे करें बचाव
पुलिस ने अपील की है कि किसी के पास पॉप-अप या सुरक्षा अलर्ट आए तो घबराएं नहीं। ऐसे संदेश अक्सर साइबर अपराधियों की ओर से भ्रमित करने के लिए प्रदर्शित किए जाते हैं। पॉप-अप में प्रदर्शित टोल-फ्री नंबर पर कॉल न करें। अज्ञात व्यक्ति के कहने पर रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर डाउनलोड या इंस्टॉल न करें। गोपनीय बैंकिंग जानकारी साझा न करें। साइबर धोखाधड़ी की आशंका हो तो तत्काल संबंधित बैंक को सूचित करें और राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।
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