गौरव का कहना था कि वाईपी सिंह ही सद्भाव इंजीनियरिंग लिमिटेड में खंभों की सप्लाई कर रहे हैं। ऑर्डर के लिए प्रवीण तैयार हो गए। गौरव अपने साथ रितेश और वाईपी सिंह को लेकर उनके घर आ गया। वहां वाईपी सिंह ने कहा कि दो जेनरेटर की कीमत 13738700 रुपये है और वह मुंबई में उनकी आपूर्ति कर देंगे। इसके लिए वाईपी सिंह ने 25 लाख रुपया एडवांस लिया।
बकौल प्रवीण, 18 नवंबर को गौरव ने दोनों जेनरेटर मुंबई पहुंचने और बकाया रकम देने के लिए कहा। इस पर प्रवीण ने 22 नवंबर को चेक से 45 लाख रुपये, छह जनवरी 2020 को चेक से 30 लाख व सात जनवरी को 3738700 रुपये ग्लोबल कंपनी के एचडीएफसी उन्नाव दही चौकी स्थित अकाउंट में ट्रांसफर कर दिए।
प्रवीण का कहना है कि इसी बीच रितेश उनके घर आया और खंभे सप्लाई का वर्क ऑर्डर फर्जी होने की जानकारी दी। उसका कहना था कि गौरव ने वाईपी सिंह के जरिये उनका रुपया हड़प लिया है। उन्होंने गौरव से बात की तो उसने जेनरेटर सप्लाई का ऑर्डर सही बताया।
प्रवीण ने पूरे काम की छानबीन के लिए रितेश को गौरव के साथ मुंबई भेजा। रितेश का कहना है कि वहां गौरव उसे धोखा देकर भाग गया। रितेश जे कुमार कंपनी के ऑफिस गया तो पता चला कि वहां शक्ति बिल्डवेल कंपनी से किसी तरह का काम नहीं कराया जा रहा है। इसके बाद प्रवीण ने एफआईआर दर्ज कराई।