चार साल पहले छोड़ दिया गांव
पुलिस के मुताबिक जालसाज ने नौकरी के नाम पर ठगी का धंधा अपने गांव व आसपास के इलाके से शुरू किया था। वहां 30 से 40 लोगों से नौकरी दिलाने के नाम पर रुपये वसूल चुका था।
जब ज्यादा तगादा होने लगा और लोग उसके घर पर धमकने लगे तो वहां से भाग निकला। वह पिछले चार साल से लखनऊ में रहता था। लखनऊ पहुंचकर जालसाजी का काम काफी तेजी से रफ्तार पकड़ने लगा। उसने कुछ लोगों के जरिए युवकों को झांसा देना शुरू कर दिया।
लोक भवन पर बुलाता था मिलने के लिए
प्रभारी निरीक्षक के मुताबिक प्रेमसागर नौकरी दिलाने व ट्रांसफर-पोस्टिंग के लिए लोगों से मिलने के लिए जब भी बुलाता था। उस वक्त वह लोक भवन के पास मौजूद रहता था। वहां लोगों से बातचीत कर पास दिखाकर अंदर चला जाता था। यह सिलसिला कई बार करता ताकि लोगों को भरोसा हो जाए। इसके बाद लोगों से रुपये की लेनदेन की बात करता।
फर्जी पहचान पत्र व पास मिला
पुलिस के मुताबिक जालसाज प्रेमसागर के पास से सचिवालय में गृह विभाग के समीक्षा अधिकारी के पद का पहचान पत्र मिला है। इसके अलावा उसके पास से सचिवालय का पास मिला जिसकी जांच के बाद वह भी कूट रचित पाया गया।
यहीं नहीं उसने अपनी बाइक पर भी उत्तर प्रदेश शासन लिखवा रखा था। इसके अलावा उसके पास से दो मोबाइल, वाहन पास, 66 विजिटिंग कार्ड (जिस पर उत्तर प्रदेश शासन गृह विभाग लिखा था), एक एटीएम कार्ड, एक चेक एसबीआई व एक चेक पीएनबी, एक लोक सेवा आयोग का प्रार्थना पत्र, एक हाईकोर्ट का आदेश पत्र भी बरामद हुआ।