साइबर क्राइम सेल ने हजरतगंज में रविवार दोपहर नीली बत्ती की कार से फर्राटा भर रहे तीन जालसाजों को गिरफ्तार किया है। उनके कब्जे से फर्जी आइडेंटिटी कार्ड, शासनादेश के साथ कई जिलों के डीएम व एडीएम को फैक्स से भेजे फर्जी पत्र व अन्य जाली दस्तावेज बरामद हुए।
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आठवीं पास जालसाज खुद को पीसीएस अफसर बताता था और दसवीं फेल रिश्तेदार उसका वाहन चालक था। इंटर पास जालसाज ने इलाहाबाद बैंक का जोनल मैनेजर व प्रशासनिक अधिकारी बनकर कई लोगों से लाखों की ठगी की थी। तीनों जालसाजों की हजरतगंज व वजीरगंज पुलिस को जालसाजी व लाखों की ठगी के मुकदमों में तलाश थी।
साइबर क्राइम सेल के नोडल अधिकारी/सीओ हजरतगंज अशोक कुमार वर्मा ने बताया कि साइबर क्राइम सेल, हजरतगंज व वजीरगंज थाने की संयुक्त टीम ने रविवार दोपहर इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस की मदद से रविवार दोपहर लालबाग में नीली बत्ती की कार में सवार तीन जालसाजों को गिरफ्तार किया।
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कार की नंबर प्लेट पर भारत सरकार लिखा था। कार की पिछली सीट पर सवार एक जालसाज ने खुद को इलाहाबाद बैंक का नोडल अधिकारी/पीसीएस अफसर कमल अवस्थी, दूसरे ने इलाहाबाद बैंक का जोनल मैनेजर व उत्तर प्रदेश सरकार का प्रशासनिक अधिकारी केडी सिंह और चालक ने अपना नाम मोनू बताया।
उनके कब्जे से मिनिस्ट्री ऑफ लेबर एंड इंप्लायमेंट भारत सरकार व मिनिस्ट्री ऑफ केमिकल एंड फर्टिलाइजर का आईडी कार्ड, डीएम गोंडा, डीएम मऊ, डीएम अंबेडकरनगर, डीएम गौतमबुद्धनगर, डीएम अलीगढ़ को फैक्स से भेजे फर्जी पत्र की प्रति, फैजाबाद के एडीएम वित्त एवं राजस्व को जारी पत्र व नगरनिगम कानपुर का फर्जी प्रमाणपत्र व फर्जी शासनादेश बरामद हुआ।
सवालों पर उगला सच
इसी कार से घूम रहे थे ठग
- फोटो : Amar Ujala
साइबर क्राइम सेल के इंस्पेक्टर जनार्दन दुबे व एसआई विजयवीर सिंह सिरोही ने सवाल शुरू किए तो जालसाज सच उगलने लगे। खुद को पीसीएस अफसर कमल अवस्थी बताने वाला इटौंजा के अटेसुआ निवासी रामकृपाल द्विवेदी निकला। वह आठवीं तक पढ़ा था।
हाईस्कूल फेल कार चालक मोनू की पहचान रामकृपाल के चचेरे भाई तरुण द्विवेदी के रूप में हुई। खुद को प्रदेश सरकार का प्रशासनिक अधिकारी केडी सिंह बताने वाला हरदोई के अतरौली थाने के गांव गोड़ीगुड़वा निवासी कुलदीप रस्तोगी निकला। तीनों ने दस साल में विभिन्न योजनाओं का झांसा देकर अनेक लोगों से लाखों की ठगी कुबूली।
सीओ हजरतगंज ने बताया कि जालसाजों का गिरोह लोगों से मोबाइल पर संपर्क करके लुभावना झांसा देकर जाल में फंसाता था। शहर व गांवों के घरों पर सर्वेक्षण प्लेट राष्ट्रीय कार्यक्रम, जनसंख्या व एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के तहत ‘कम संतान-सुखी इंसान’ व ‘एड्स से बचो सुरक्षित रहो’ के नारों की प्लेट लगाने का विभिन्न जिलों में काम दिलाने के नाम पर एनजीओ संचालकों से लाखों की ठगी की और संबंधित जिलों के डीएम को फैक्स से आदेश भी भेज दिया।
प्रधानमंत्री ग्राम रोजगार योजना के तहत कर्ज का झांसा देकर बेरोजगारों से ठगी की। इसके अलावा लोगों के घर या दुकान में एटीएम बूथ खोलने का ढांसा देकर ठगी करते थे। इसके बाद मोबाइल नंबर बदल लेते थे।
केस : एक
जालसाजों ने ठाकुरगंज के एकतानगर निवासी देवी प्रसाद को नगरनिगम का ठेका दिलाने के बहाने एक लाख और उसके माध्यम से सीतापुर की अनीता कौशल समेत चार लोगों को कर्ज दिलाने का झांसा देकर छह लाख की ठगी की। सभी को लंबे समय तक टरकाया। ठगी का अहसास होने पर देवी प्रसाद व उसके साथियों ने वजीरगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
केस : दो
सीतापुर के कस्बा सिधौली के अमरीश कुमार पांडेय को इलाहाबाद बैंक का एटीएम बूथ लगाने का झांसा देकर ढाई लाख रुपये ठगे। खास बात यह है कि गारंटी के रूप में रकम जमा कराने के बाद जालसाजों ने कुछ दिनों प्रक्रिया पूरी होने का झांसा दिया। इसके बाद दस हजार रुपये के हिसाब से दो महीने तक उसके खाते में किराए की रकम भेजी।
केस : तीन
अमरीश का विश्वास जीतने के बाद जालसाजों ने सीतापुर के ही कस्बा अटरिया में पेट्रोलपंप मालिक सुधाकर तिवारी को एटीएम बूथ लगवाने का झांसा देकर तीन लाख रुपये ठगे। कागजी खानापूरी की बात कहकर टालमटोल कर रहे थे। जालसाजों का कहना है कि वह सुधाकर को भी एटीएम बूथ लगाए बगैर दो-चार महीने किराए का भुगतान करने की तैयारी में थे ताकि उसके माध्यम से किसी और को जाल में फंसाया जा सके।
ठगी का शिकार बने एकतानगर निवासी देवी प्रसाद, पारा के गोलू, सिधौली के रामविलास व अशोक कुमार अपने स्तर से भी जालसाजों की तलाश कर रहे थे। वह 28 फरवरी को रामकृपाल की गाड़ी का पीछा करते इटौंजा पहुंचे और गाड़ी रोककर तगादा किया।
जालसाजों ने उसने हाथापाई की और भाग निकले। पीड़ितों ने इटौंजा थाने पर हंगामा किया। एसओ महेंद्र यादव ने तहरीर लेकर कार्रवाई का आश्वासन दिया। नतीजा न निकलने पर पीड़ितों ने एसएसपी से शिकायत की।
इस पर साइबर क्राइम सेल के इंस्पेक्टर जनार्दन दुबे, एसआई विजयवीर सिंह सिरोही, कांस्टेबल फिरोज बदर, अखिलेश सिंह, शरीफ खां व हजरतगंज कोतवाली के एसआई विजय पांडेय और वजीरगंज थाने के एसआई यदुनाथ यादव की टीम गठित की गई थी।