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न्यायमूर्ति और अफसर बनकर ठगी करने वाले गिरोह के तीन सदस्य दबोचे

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न्यायमूर्ति-अफसर बन ठगी करने वाले गिरोह के तीन गुर्गे दबोचे, तालकटोरा पुलिस ने गोरखपुर से पकड़ा
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न्यायमूर्ति और अफसर बनकर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तालकटोरा पुलिस ने तीन शातिरों को गिरफ्तार कर लिया।
शातिरों ने यूपीपीसीएल का चेयरमैन बनकर राजाजीपुरम निवासी ठेकेदार सैय्यद मोबीन अहमद से दस लाख रुपये वसूले थे और चीफ जस्टिस बनकर गोमतीनगर स्थित न्यायिक प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान के अधिकारियों से 10 लाख रुपया मांग रहे थे।
इंस्पेक्टर धनंजय सिंह ने बताया कि गिरोह का सरगना नीरज सिंह उर्फ नीरज पांडेय उर्फ चुन्नू है जो फरार है। उसकी तलाश में पुलिस की टीमें लगाई गई हैं।
इंस्पेक्टर ने बताया कि पकड़े गए बदमाशों में बिहार के मोतिहारी स्थित पूर्वी चंपारन के राजेपुर सेमराहन गांव निवासी सत्यदेव उर्फ पेंटर बाबू, मुजफ्फरपुर के काजी मोहम्मदपुर स्थित माणीपुर चित्रगुप्तपुरी निवासी राम कुमार उर्फ रामू और प्रशांत कुमार उर्फ मिट्ठू हैं।
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तीनों बिहार के मुजफ्फरपुर के बैरिया में रहने वाले नीरज सिंह काम करते थे। 16 अगस्त को इसी गिरोह ने खुद को यूपीपीसीएल का चेयरमैन आलोक कुमार बताते हुए राजाजीपुरम निवासी व सैय्यद ट्रेडर्स फर्म के मालिक ठेकेदार सैय्यद मोबीन अहमद को फोन कर दस लाख रुपये ठगे थे।
सैय्यद मोबीन अहमद की तरफ से दर्ज केस की जांच अतिरिक्त निरीक्षक फूलचंद को सौंपी गई थी। जिस मोबाइल नंबर से कॉल की गई थी।
पुलिस ने उसे सर्विलांस पर लगाया। मोबाइल की लोकेशन के आधार पर पुलिस की टीमें पश्चिम बंगाल के मिदनापुर, बिहार के मुजफ्फरपुर, पटना और झारखंड गई।
अतिरिक्त निरीक्षक फूलचंद ने बताया कि आरोपियों की लोकेशन लगातार बदल रही थी। ऐसा लग रहा था कि वह सफर कर रहे हैं।
गोरखपुर में बदमाशों के रुकने का पता चला तो पुलिस ने घेराबंदी कर तीन शातिरों को दबोच लिया। अधिकारियों का नाम लेकर ठगी करने वाले शातिरों की गिरफ्तारी की जानकारी पाकर गोमतीनगर पुलिस ने भी आरोपियों से पूछताछ की।
इस पर उन्होंने हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनकर जेटीआरआई के अधिकारियों से दस लाख रुपया मांगने की बात भी कुबूली।
उक्त मामले में हाईकोर्ट के सीनियर रजिस्ट्रार मानवेंद्र सिंह की तरफ से गोमतीनगर थाने में केस दर्ज कराया गया था।
पकडे़ गए बदमाशों के पास से 20 हजार नकद, चार मोबाइल, फर्जी वोटर आईडी व पैन कार्ड, फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस और अन्य दस्तावेज बरामद हुए हैं। एसएसपी कलानिधि नैथानी ने पुलिस टीम को 25 हजार रुपये का नकद पुरस्कार देने की घोषणा की है।
मोबाइल नंबर, सीसीटीवी फुटेज, बैंक खातों से हुई ठगों की पहचान
तालकटोरा थाना के अतिरिक्त निरीक्षक फूलचंद ने बताया कि ठगों के मोबाइल नंबर की लोकेशन के आधार पर पुलिस ने छानबीन शुरू की। जिन प्रदेशों और स्थानों पर जिस वक्त मोबाइल नंबर की लोकेशन मिली थी, वहां लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज निकलवाई गई। सैय्यद मोबीन अहमद ने बिहार के मुजफ्फरपुर में जिस अमरेश सरन के एचडीएफसी बैंक खाते में रुपया ट्रांसफर किया था, उसके बारे में जानकारी जुटाई गई। बैंक से खाताधारक का फोटो हासिल करने के साथ ही वहां के अधिकारियों-कर्मचारियों से पूछताछ की गई। करीब एक सप्ताह की इस मशक्कत के बाद पुलिस को शातिरों का सुराग और उनके फोटो मिल सके।
जयपुर में भी दर्ज हैं शातिरों के खिलाफ केस
अतिरिक्त निरीक्षक फूलचंद ने बताया कि शातिरों के खिलाफ जयपुर में विशेष अपराध एवं साइबर पुलिस थाना में भी धोखाधड़ी और षड्यंत्र की धाराओं में केस दर्ज है। वहां भी उन्होंने अधिकारी बनकर ठगी की कोशिश की थी।
वेबसाइट से मोबाइल नंबर लेकर ट्रू कॉलर में अफसर के नाम से सेव करते थे
शातिरों ने पूछताछ में बताया कि वह विभिन्न विभागों की वेबसाइट से अफसरों का नाम व मोबाइल नंबर लेते थे। इसके बाद अफसरों से संबंधित अधिकारियों और उनसे जुड़े लोगों के नंबर हासिल करके उन्हें कॉल की जाती थी। शातिर अपना मोबाइल नंबर ट्रू कॉलर में अधिकारी के नाम से ही सेव करते थे। जब किसी व्यक्ति के पास उनके नंबर से कॉल जाती तो ट्रू कॉलर में संबंधित अधिकारी का नाम लिखकर आता। इससे लोग आसानी से झांसे में आ जाते थे।
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मजदूरों, रिक्शा-ठेले वालों की आईडी लेकर करते थे फर्जीवाड़ा
सत्यदेव उर्फ पेंटर बाबू और राम कुमार उर्फ रामू ने बताया कि वह मजदूरों, रिक्शा चालकों या ठेलेवालों की वोटर आईडी, आधार कार्ड अथवा अन्य पहचानपत्र लेकर फर्जीवाड़ा करते थे। उनके आईडी पर अपनी फोटो लगाकर सिमकार्ड खरीदते और बैंक में खाता खुलवाते थे। राम कुमार उर्फ रामू ने बायो से एमएससी किया है और बैंक में खाते खुलवाना व रुपये इधर से उधर ट्रांसफर करने का काम वही करता था। सत्यदेव उर्फ पेंटर बाबू भूगोल से स्नातक होने के अलावा तकनीकी विषयों का जानकार है जबकि प्रशांत कुमार उर्फ मिट्ठू इंटर पास है। गिरोह का सरगना नीरज सिंह अधिकारी बनकर लोगों को फोन करता था।
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