लखनऊ। आवास विकास परिषद का अधिकारी बताकर प्लॉट आवंटित कराने और बच्चों को सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर सेवानिवृत्त सूबेदार की पत्नी से 97.54 लाख रुपये की ठगी की गई। पीड़िता राज किशोरी द्विवेदी ने रविवार को पीजीआई थाने में पांच नामजद और दो अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है।
मूलरूप से बांदा के तिंदवारा निवासी राज किशोरी वर्तमान में वृंदावन सेक्टर-6सी में रहती हैं। उनके पति आनंद कुमार द्विवेदी 30 नवंबर 2016 को सेना में सूबेदार मेजर पद से सेवानिवृत्त हुए थे। इसके बाद परिवार लखनऊ में बसने की तैयारी कर रहा था। इसी दौरान उनकी मुलाकात नेकपाल, उसकी पत्नी सोमलता और उनके परिचितों से हुई। आरोप है कि राजेंद्र प्रसाद ने खुद को आवास विकास परिषद का अधिकारी बताकर प्लॉट दिलाने और बच्चों को नौकरी लगवाने का भरोसा दिया।
पीड़िता के मुताबिक, प्लॉट आवंटन के नाम पर 27 लाख और कार्यालय खर्च के लिए करीब 10 लाख रुपये लिए गए। इसके बदले फर्जी आवंटन पत्र और रसीदें दी गईं। वहीं, नौकरी के लिए साक्षात्कार कराने का झांसा देकर उनके बेटे और उसके मित्र से पांच-पांच लाख रुपये भी लिए गए। पीड़िता का दावा है कि आरोपियों ने धीरे-धीरे करके कुल 97.54 लाख रुपये ऐंठ लिए। उन्होंने रकम जुटाने के लिए संपत्ति और जेवर बेच दिए थे। दिसंबर 2023 में राजेंद्र के जेल जाने के बाद अन्य आरोपियों ने फरवरी-मार्च 2024 तक रजिस्ट्री कराने का आश्वासन दिया लेकिन ऐसा नहीं हुआ। रकम मांगने पर धमकियां दी गईं। पीड़िता का आरोप है कि 21 मार्च 2026 की रात दो अज्ञात लोग उनके घर पहुंचे और धमकाया।
पीजीआई इंस्पेक्टर सुनील कुमार सिंह ने बताया कि नेकपाल, सोमलता, सिराजुद्दीन शेख, राजेंद्र प्रसाद और उसकी पत्नी रुकमनी व दो अज्ञात लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी व धमकी देने की धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है।