लखनऊ। स्मारक समिति के 6500 कर्मचारियों के पीएफ से 10 करोड़ रुपये के गबन के मामले में सोमवार देर रात गिरफ्तार कर जेल भेजे गए राइट पे कंपनी के मालिक सतीश चंद्र पांडेय के बारे में कई चौंकाने वाली जानकारियां पुलिस को मिली हैं। सतीश अपनी कंपनी राइट पे को पेटीएम की तरह ही ऑनलाइन पेमेंट कंपनी बनाना चाहता था। इसी वजह से वह दो बड़े जालसाजों संदीप पी और मंगलेश के चक्कर में फंस गया। कंपनी को लाइसेंस तो नहीं मिला लेकिन दाग जरूर लग गया।
राइट पे कंपनी के मालिक सतीश चंद्र पांडेय की पारिवारिक पृष्ठभूमि अच्छी है। उसके एक भाई चार्टर्ड अकाउंटेंट तो दूसरे सुप्रीम कोर्ट में वकील हैं। पुलिस के मुताबिक, सतीश ने पूछताछ में बताया कि वह अपनी कंपनी को ऑनलाइन पेमेंट कंपनी बनाना चाहता था। इसके लिए उसने आरबीआई में आवेदन किया था। आरबीआई के अनुसार, कंपनी को लाइसेंस मिलने के लिए एक साल में कम से कम 50 करोड़ का टर्नओवर जरूरी था। इसी दौरान उसकी मुलाकात कर्नाटक सीबीआई कोर्ट से छह करोड़ के घोटाले में सजायाफ्ता संदीप पी और उसके दोस्त मंगलेश से मुलाकात हुई। मंगलेश और संदीप ने कंपनी के खाते में एक साल के अंदर 50 करोड़ का टर्नओवर कराने का दावा किया। इस काम के लिए दोनों ने सतीश से करीब 70 लाख रुपये लिए जिसमें संदीप पी ने 65 और मंगलेश ने पांच लाख रुपये लिए। दबाव के चलते सतीश को अपनी पत्नी हेमा को हटाकर मंगलेश को डायरेक्टर बनाना पड़ा। इसी दौरान स्मारक समिति के लेखाकार संजय सिंह, संदीप और उसके अन्य साथियों ने पीएफ के रुपये में खेल करने की योजना बनाई।
35 करोड़ रुपये खाते में पहुंचे, फिर करने पड़े वापस
अचानक से अप्रैल 2021 से राइट पे कंपनी के खाते में एक-एक कर 35 करोड़ रुपये पहुंच गए। यह रकम स्मारक समिति के कर्मचारियों के पीएफ की थी। लेकिन इस जालसाजी की जानकारी सतीश को बैंक से कॉल जाने के बाद हुई। खुद को बचाने के लिए संदीप व मंगलेश ने रुपये वापस कराने शुरू कर दिए। कंपनी के खाते का संचालन सतीश करता था। उसे बताया गया कि टर्नओवर दिखाने के लिए रुपये का आवागमन बना रहना चाहिए। लेकिन इसके पहले ही संदीप व मंगलेश ने मिलकर कंपनी के खाते का 10 करोड़ रुपये अपने परिचितों के निजी व कंपनी केखातों में जमा करा दिया था जो राइट पे के खाते में नहीं था। इसलिए यह रकम वापस नहीं आई।
15 कंपनियों व निजी खातों में भेजे गये रुपये
पुलिस की पड़ताल में सामने आया कि राइट पे कंपनी के खाते से 10 करोड़ रुपये 15 से अधिक खातों में ट्रांसफर किए गए। इनमें से कुछ खाते निजी हैं तो कुछ कंपनियों के हैं। पुलिस को कुछ खाताधारकों के मोबाइल नंबर व पते मिल गए हैं। पुलिस सभी से संपर्क कर रही है। ताकि स्मारक समिति का धन उनके सही खाते में वापस आ सके। पुलिस की पड़ताल में सामने आया कि यह रुपये भी संदीप पी और मंगलेश ने ही ट्रांसफर कराए थे।