लखनऊ। नेशनल पीजी कॉलेज ने रिसर्च एंड डेवलेपमेंट परियोजना के तहत महाविद्यालय में चार शोध प्रस्तावों को स्वीकृति दी है। शोध करने वाले शिक्षकों कुल 19 लाख रुपये का शोध अनुदान दिया जाएगा। इसमें एक मेजर और तीन माइनर प्रोजेक्ट शामिल हैं। इन शोध प्रस्तावों में शिक्षक विभिन्न विषयों पर शोध कर अनुसंधान तथ्य प्रस्तुत करेंगे।
प्राचार्य प्रो. देवेंद्र सिंह ने बताया कि रिसर्च एंड डेवलेपमेंट सेल की बैठक में शिक्षकों के शोध प्रस्तावों पर पीपीटी के माध्यम से प्रजेंटेशन हुआ। इसमें प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई। महाविद्यालय ने 13 जनवरी से 28 फरवरी के बीच समस्त संकायों के प्राध्यापकों से मेजर और माइनर रिसर्च प्रोजेक्ट के लिए आवेदन मांगे थे।
इसमें चार विभागों के छह शिक्षकों ने व्यक्तिगत और संयुक्त रूप से शोध आवेदन प्रस्तुत किए थे। जांच के बाद सभी को स्वीकृति प्रदान कर दी गई। प्राचार्य ने बताया कि मेजर प्रोजेक्ट के तहत बीवॉक कोर्स के डॉ. विनय ब्लाक चैन टेक्नोलॉजी के क्रम में बुंदेलखंड इलाके के किसानों की समस्याओं पर कार्य करेंगे।
इसका उद्देश्य किसानों को अद्यतन सूचनाएं प्रदान करना होगा। माइनर प्रोजेक्ट में डॉ. शुभम, डॉ. नीरज आर्या रील और सोशल मीडिया का समाज के युवाओं पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन करेंगे। डॉ. गगन व डॉ. निधि प्रोजेक्ट में श्री अन्न अध्ययन करेंगे, जो इसकी खपत पर केंद्रित होगा।
वनस्पति विज्ञान विभाग के डॉ. अभिजीत चटर्जी का शोध कार्य ऐसी फसलों का आंकड़ा तैयार करने पर आधारित है, जिनका कम उपयोग हो रहा है जैसे बथुआ, नारी साग आदि।
पूर्व प्रोजेक्टों की प्रस्तुत की रिपोर्ट
रिसर्च एंड डेवलेपमेंट सेल की बैठक में पूर्व शोध प्रस्तावों के क्रम में अनुदान प्राप्त कर चुके शिक्षकों ने प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। विशेषज्ञों ने अपनी टिप्पणी प्रस्तुत की। इस दौरान प्रो. राकेश जैन, प्रो. पीके सिंह, प्रो. ज्योति भार्गव, डॉ. अपर्णा सिंह, डॉ. निधि श्रीवास्तव आदि उपस्थित रहीं।