राजकीय नेशनल होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज के करीब करीब चार सौ छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है। यहां कार्यरत शिक्षकों की संविदा खत्म हो गई है। दूसरी तरफ केंद्रीय होम्योपैथिक परिषद ने कॉलेज संबंधी ब्यौरा तलब कर लिया है। इस ब्यौरे के आधार पर अगले सत्र में पठन-पाठन पर निर्णय लिया जाएगा।
परिषद को शिक्षकों के नहीं होने की सूचना भेजते हैं तो कॉलेज की सीटों की मान्यता लटक सकती है। नेशनल होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज में अंडर ग्रेजुएट की 125 और पोस्ट ग्रेजुएट की 54 सीटें हैं। यहां सभी सत्रों को मिलाकर करीब चार सौ छात्र हैं। पढ़ाई के साथ यहां ओपीडी और मेडिकल रिसर्च का भी काम चल रहा है।
पीजी के छात्र कोरोना काल में दूसरी बीमारियों से जूझ रहे मरीजों की सेवा में लगे हैं। कॉलेज में कई साल से शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की कमी है। ऐसे में संविदा के जरिए पदों को भर कर काम चलाया जा रहा था। हर साल 11 माह की संविदा के आधार पर शिक्षकों एवं शिक्षणेतर कर्मचारियों की नियुक्ति की जाती है। यहां 32 शिक्षक एवं 42 अन्य स्टाफ संविदा पर कार्यरत हैं। इस साल जून में संविदा खत्म हो गई है। लेकिन अभी तक पद भरने के संबंध में शासन की ओर से फैसला नहीं लिया गया है।