फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चार सौ होम्योपैथिक छात्रों का भविष्य दांव पर, अफसरों से लेकर मंत्री तक के यहां चक्कर काट रहे हैं स्टूडेंट्स

Sat, 25 Jul 2020 03:52 PM IST
ishwar ashish चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

राजकीय नेशनल होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज के करीब करीब चार सौ छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है। यहां कार्यरत शिक्षकों की संविदा खत्म हो गई है। दूसरी तरफ केंद्रीय होम्योपैथिक परिषद ने कॉलेज संबंधी ब्यौरा तलब कर लिया है। इस ब्यौरे के आधार पर अगले सत्र में पठन-पाठन पर निर्णय लिया जाएगा।

विज्ञापन


परिषद को शिक्षकों के नहीं होने की सूचना भेजते हैं तो कॉलेज की सीटों की मान्यता लटक सकती है। नेशनल होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज में अंडर ग्रेजुएट की 125 और पोस्ट ग्रेजुएट की 54 सीटें हैं। यहां सभी सत्रों को मिलाकर करीब चार सौ छात्र हैं। पढ़ाई के साथ यहां ओपीडी और मेडिकल रिसर्च का भी काम चल रहा है।

पीजी के छात्र कोरोना काल में दूसरी बीमारियों से जूझ रहे मरीजों की सेवा में लगे हैं। कॉलेज में कई साल से शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की कमी है। ऐसे में संविदा के जरिए पदों को भर कर काम चलाया जा रहा था। हर साल 11 माह की संविदा के आधार पर शिक्षकों एवं शिक्षणेतर कर्मचारियों की नियुक्ति की जाती है। यहां 32 शिक्षक एवं 42 अन्य स्टाफ  संविदा पर कार्यरत हैं। इस साल जून में संविदा खत्म हो गई है। लेकिन अभी तक पद भरने के संबंध में शासन की ओर से फैसला नहीं लिया गया है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

यहां फंस रहा पेंच

सूत्र बताते हैं कि परिषद ने प्रधानाचार्य से शिक्षकों के बारे में हलफनामा मांग लिया है। ऐसे में यदि नियमित तौर पर कार्यरत 20 शिक्षकों का विवरण भेजा जाता है तो पीजी की सभी सीटें खत्म हो जाएगी और यूजी की सीटों में भी कटौती हो जाएगी। यदि वह हलफनामा नहीं देते हैं तो उनकी गर्दन नपनी तय हैं। ऐसे में नुकसान छात्रों का ही होना है।

यह सही है कि परिषद की ओर से हलफनामा मांगा गया है। इस संबंध में शासन को पत्र लिखा गया है। संविदा पर ही शिक्षक व अन्य स्टाफ  मिलने की उम्मीद है। प्रयास है कि छात्रों का नुकसान न होने पाएं। - डॉ. अरविंद कुमार वर्मा, प्रधानाचार्य
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें