वह दृश्य दिल दहलाने वाला था। हर ओर आंसुओं में डबडबाई आंखें थीं। मासूम की बातें और खुशहाल परिवार के उजड़ जाने की चर्चाएं थीं। आगरा एक्सप्रेस-वे पर स्कैनिया बस हादसे की शिकार मां व छह साल की मासूम के शव जैसे ही राजाजीपुरम में पुराना सी-ब्लॉक स्थित घर पहुंचे तो परिवारीजन ही नहीं, पूरा मुहल्ला फूट-फूटकर रोया। हादसे में मासूम निति मां डॉ. ज्योति निर्वाण की छाती से चिपटी हुई ही काल के गाल में समा गई। दोनों का पोस्टमार्टम एक साथ हुआ और शव एक ही अर्थी पर अंत्येष्टि को श्मशान ले जाए गए। राज्यपाल राम नाईक ने दोनों को श्रद्धांजलि दी।
घायलों का सैफई अस्पताल में इलाज करवाया जा रहा है।
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आगरा एक्सप्रेस- वे पर हादसा
- फोटो : amar ujala
दिल्ली से लखनऊ आ रही आलमबाग बस टर्मिनल की स्कैनिया बस रविवार देर रात आगरा एक्सप्रेस-वे पर हादसे की शिकार हो गई। इसमें राजाजीपुरम के सी-188 निवासी डॉ. ज्योति निर्वाण (38) बेटी निति के साथ सवार थीं।
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दुर्घटना में मां-बेटी की मौत हो गई। चूंकि, मासूम मां की छाती से चिपटी हुई थी, इसलिए हादसे के बाद दोनों को अलग नहीं किया जा सका। दोपहर बाद जब दोनों के शव राजाजीपुरम पहुंचे तो मुहल्ला गमगीन था। ज्योति के पति डॉ. निशांत निर्वाण बदहवाश थे। शाम को राज्यपाल राम नाईक उनके आवास पर पहुंचे और दिवंगतों को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद शव अंत्येष्टि के लिए ले जाए गए।
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परिवारीजन अजय कुमार ने बताया कि डॉ. ज्योति निर्वाण एसजीपीजीआई के डिपार्टमेंट ऑफ मॉलीक्यूलर मेडिसिन एंड बायोटेक्नोलॉजी विभाग में सीनियर डिमॉन्स्ट्रेटर के पद पर थीं। पति डॉ. निशांत निर्वाण टुडियागंज के बाल महिला चिकित्सालय में हैं। उनके बड़े भाई डॉ. अनिल निर्वाण राजभवन में चिकित्सक और उनकी पत्नी डॉ. विनीता कैसरबाग रेडक्रॉस अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं। ज्योति अपने पति, बेटी व सास केसरी देवी व ससुर केएल निर्वाण के साथ रहती थीं। केएल निर्वाण आरडीएसओ से सेवानिवृत्त हैं।
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मेरा सबकुछ चला गया...
पत्नी व मासूम बेटी की मौत की खबर सुनकर डॉ. निशांत बदहवास हो गए और शव पहुंचते ही फूट-फूटकर रोने लगे। वह कहते रहे ‘मैं बर्बाद हो गया, मेरा सबकुछ चला गया।’ वहीं, डॉ. ज्योति के सास-ससुर का भी रो-रोकर बुरा हाल था।
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सुबह चार बजे मिली सूचना
आगरा एक्सप्रेस-वे पर रात करीब डेढ़ बसे हुए बस हादसे के बाद ज्योति के परिवारीजनों को आलमबाग बस टर्मिनल से सुबह चार बजे सूचना मिली। पोस्टमार्टम के बाद मां-बेटी के शव शाम को राजाजीपुरम पहुंचे। शाम पांच बजे के बाद इनकी अंत्येष्टि की गई।
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सबकी चहेती थी मासूम
मासूम निति मुहल्ले में लोगों से हिली-मिली थी। मॉर्निंग वॉक पर जाने वाले उससे जरूर मिलते थे। पड़ोसी ऋषि कुमार ने बताया कि जब तक वह बिटिया रानी को देख नहीं लेते, सैर पर नहीं जाते थे। कई बार वह छत से कहती थी ‘दादू गुड मॉर्निंग’। ऐसे ही प्रदीप शुक्ल ने बताया कि उससे बहुत गहरा लगाव हो गया था।
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इसलिए निति रखा था नाम
परिवारीजनों ने बताया कि शादी के दो साल बाद पैदा हुई निति का नाम ऐसा रखा गया, जिसमें पिता व मां, दोनों के नाम आ जाएं। निति में पहला अक्षर पिता निशांत, अंतिम अक्षर मां ज्योति के नाम से लिया गया था।
सेमिनार में हिस्सा लेने गई थीं डॉ ज्योति
डॉ. ज्योति की शादी दिसम्बर, 2011 में निशांत निर्वाण से हिसार में हुई थी। उनके पिता पवन कुमार ने नोएडा में घर बनवाया था। जहां गत 23 मार्च को ज्योति बेटी के साथ गई हुई थीं। अगले दिन परीक्षा देने के बाद पिता ने रात में नोएडा से उन्हें बस में बैठाया था।