विलाप करते बच्चों के परिवारीजन।
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इस बीच नदी से बाहर निकाले गए सत्यम ने एक मछुआरे के मोबाइल फोन से घर वालों को सूचित किया। बच्चों के डूबने की सूचना पाते ही रमसापुर और बौढ़िया बालमऊ गांव में कोहराम मच गया। तमाम ग्रामीण नदी के किनारे पहुंच गए। इस बीच मनीष, शिवम, मोहम्मद हमीद का शव मछुआरे पानी से निकाल चुके थे, लेकिन प्रिंस का पता नहीं चल रहा था। करीब दो घंटे बाद मछुआरों ने प्रिंस का शव भी बाहर निकाल लिया।
नदी में बच्चों के डूबने की सूचना मिलते ही सीओ कादीपुर डीपी शुक्ला, तहसीलदार हरीशचंद्र व एसओ करौंदीकलां अमित कुमार भी मौके पर पहुंच गए। तहसीलदार ने कहा कि पानी में डूबकर मरने वाले बच्चों के परिवारीजनों को मुख्यमंत्री राहत कोष से मदद दिलाई जाएगी।
देवदूत बनकर पहुंचे निषादराज
सहाबुद्दीनपुर गांव के किनारे जब नौ बच्चे पानी में डूबे तो निषादराज के नाम से चर्चित बाल मुकुंद निषाद, शिवकुमार निषाद, बबलू निषाद, राजकुमार निषाद, श्रीकांत निषाद और मंतलाल वहां मौजूद थे। बच्चों की चीख-पुकार सुनकर सभी मछुआरे नदी में कूद गए। एक-एक कर पांच बच्चों को मछुआरों ने बचा लिया, लेकिन चार बच्चों को नहीं बचा पाने का मछुआरों को मलाल है। बाल मुकुंद ने कहा कि सभी बच्चों को बचा पाते तो हम लोगों को खुशी होती।
रमसापुर गांव निवासी हरिलाल के परिवार में पत्नी लक्ष्मीना के साथ ही दो बेटे थे। इनमें सबसे बड़ा बेटा सभाजीत (19) व छोटा मनीष (11) के साथ ही बेटी सनी, मनी हैं। मनीष की मौत से परिवार में कोहराम मचा है। लक्ष्मीना को छोटे बेटे की मौत पर यकीन नहीं हो रहा था।
भाई के शव के पास बैठकर बिलखता रहा बड़ा भाई
रमसापुर निवासी त्रिभुवन पासवान के परिवार में पत्नी प्रियंका के साथ ही दो बेटे थे। बड़ा बेटा सत्यम (11) और छोटा शिवम (8) था। नदी में डूबने से शिवम की मौत हो गई, जबकि मछुआरों ने सत्यम को बचा लिया। छोटे भाई की मौत से आहत सत्यम काफी देर तक अपने भाई के शव के पास ही बैठकर बिलखता रहा।
सूरज ने बताया कि वह जब पानी में डूबने लगा तो अपने छोटे भाई लक्की का हाथ पकड़ा था। दोनों भाई जोर-जोर से भगवान को याद करके चिल्ला रहे थे कि भगवान बचाओ, ऐसे में अंकल आ गए और हम दोनों भाइयों को पानी में डूबने से बचा लिया।
करीम ने बताया कि वह चिल्ला रहा था, तभी चाचा पानी में आ गए और मेरे बाल पकड़कर पानी से बाहर निकाल लिया। यदि चाचा (मछुआरे) नहीं आते तो मैं बच नहीं पाता।
सत्यम ने रोते हुए कहा कि जिस समय मैं और मेरा छोटा भाई शिवम पानी में डूब रहे थे तो मैंने जोर-जोर से आवाज लगाई। ऐसे में मछुआरे पहुंचे और मुझे तो बचा लिया, लेकिन मेरा प्यारा भाई नहीं रहा। मनीष ने बताया कि वह पानी में थोड़ा डूबा था। तभी मछुआरों ने उसे बचा लिया।
बच्चों को बचाने वाले निषादराज बाल मुकुंद ने बताया कि जिस स्थान पर हादसा हुआ वहां 30 फिट गहराई है। अमूमन उस स्थान पर पानी में तैरने वाले लोग भी जाने से बचते हैं। ऐसे में बच्चों को पानी से बचा पाना संभव नहीं था, लेकिन भगवान ने बच्चों को बचाने की हिम्मत दी।
काश भाई को पीटने के बजाय उसे कमरे में बंद कर दिया होता
बौढ़िया बालमऊ गांव की रहने वाली शबनम के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहा है। बार-बार यही बोलती कि जब छोटा भाई मछली पकड़ने के लिए नदी में जाने की जिद कर रहा था तब उसने उसे दो थप्पड़ मारा था। इसके बाद भी हमीद मछली पकड़ने के लिए घर से निकल गया। उसे क्या पता था कि मेरा भाई अब वापस नहीं लौटेगा। शबनम ने कहा कि काश उसने भाई को मारने के बजाय किसी कमरे में बंद कर दिया होता।