लखनऊ। गोसाईंगंज इलाके में पुलिस और विरोधियों को फंसाने के लिए कुछ लोगों ने अपहरण की झूठी कहानी रच दी। पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज कर छानबीन की तो साजिश का पता चला। गोसाईंगंज पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। गिरफ्तार किए गए लोगों में तीन एक ही परिवार के हैं। इस मामले में चौकी प्रभारी गोसाईंगंज कस्बा राजकुमार ने एफआईआर दर्ज कराई है।
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चौकी प्रभारी के मुताबिक 28 सितंबर को वार्ड बाजार मध्य निवासी रामकुमार कनौजिया ने थाने में प्रार्थनापत्र देकर डायल 112 की पुलिस पर बेटे को उठा ले जाने की शिकायत की। आरोप लगाया कि उनका बेटा सुभाष कनौजिया तब से घर नहीं लौटा है। थाने में लगे सीसीटीवी कैमरे की जांच में सामने आया कि 27 सितंबर को पीआरवी को कंट्रोल रूम से कस्बा गोसाईंगंज में कॉलर ने मारपीट की सूचना दी थी। कॉलर से बात करने पर वह नशे में धुत पाया गया। जांच में पता चला कि उसी कॉलर ने 26 सितंबर को भी नशे में फोन कर विवाद की सूचना दी थी। पुलिस के पहुंचने पर कॉलर नहीं मिला था। 27 सितंबर को पुलिस कॉलर को थाने लेकर पहुंची। पूछने पर उसने अपना नाम सुभाष बताया। फुटेज में सुभाष को थाने में लाते देखा गया। थाने से छूटने के बाद सुभाष को उसकी गली में भी देखा गया, लेकिन वह घर नहीं पहुंचा। अगले दिन सुभाष के पिता की शिकायत पर गुमशुदगी दर्ज की गई।
छानबीन में सामने आई साजिश
चौकी प्रभारी ने बताया कि सर्विलांस की मदद से पड़ताल में सामने आया कि सुभाष अपने माता-पिता, भाई और अन्य लोगों के साथ मिलकर पुलिस के खिलाफ एफआईआर लिखवाने का दबाव डालने के लिए खुद लापता हुआ था। आरोपी लगातार परिजनों के संपर्क में था। छानबीन में सुभाष को खुर्दही बाजार में फुटेज में देखा गया, जो एक होटल में जाता नजर आया। उधर, सुभाष के घरवाले लगातार पुलिस के अधिकारियों के पास जाकर अनुचित दबाव डाल रहे थे। इस बीच पुलिस ने सुभाष को पकड़ लिया। पूछताछ में उसने साजिश की बात कबूल की। पुलिस ने साजिश में शामिल सुभाष, उसके भाई शुभम, पिता रामकुमार और परिचित अखिलेश को गिरफ्तार कर लिया।
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बेटे की हत्या का लगा रहे थे आरोप
पुलिस सूत्रों का कहना है कि आरोपी रामकुमार बेटे सुभाष की हत्या का आरोप लगा रहा था। वह गोसाईंगंज के चेयरमैन निखिल मिश्रा को झूठे केस में फंसाना चाहता था। इसके लिए वह अफसरों को लगातार अलग-अलग लोगों से फोन करवा रहा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन टीमें भी गठित की गई थीं। इससे पहले भी आरोपियों ने एक झूठा केस दर्ज कराया था।