सोमवार को पूर्व कर्मचारी की पत्नी की रिकॉर्डिंग के सामने आने से मंडल कार्यालय में हड़कंप मच गया। इसमें उसने पंजाबनगर कॉलोनी में क्वार्टर किराये पर देने की बात कही है। यह भी कहा कि बिजली का बिल अलग से जमा करना होगा।
सामने आया मामला पंजाबनगर कॉलोनी का है, जबकि रेलवे की अन्य कॉलोनियों में भी ऐसे क्वार्टर हैं, जहां कंडम आवास किराये पर उठाए जा रहे हैं और इससे होने वाली कमाई रेलवे की जेब में भी नहीं जा रही है। बता दें कि जर्जर आवास किराये पर देने के बाद उसमें बिजली व पानी की भी व्यवस्था करवाकर दी जाती है, जिसके लिए रेलकर्मियों की हथेलियां गर्म की जाती हैं।
उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल की कॉलोनियों में करीब 700 आवास जर्जर व कंडम हैं। इन्हें तोड़ने के आदेश भी कुछ वर्ष पहले हो चुके हैं, बावजूद इसके कार्रवाई न होने से किरायेदारी का धंधा चल रहा है। सूत्रों की मानें तो हर कॉलोनी में यह धंधा फल-फूल रहा है।
रेलवे यूनियन नेता के परिवारीजन कॉलोनी में खाली पड़े क्वार्टरों से कमाई कर रहे हैं। रेल कर्मचारियों से मिलीभगत कर यह धंधा चलाया जा रहा है। आला अधिकारियों को रिकॉर्डिंग मिलने के बाद इस खेल की भी जांच कराई जाएगी।
मोबाइल पर बातचीत में पूर्व रेलकर्मी की पत्नी ने बताया कि क्वार्टरों के टाइप के मुताबिक किराया रहेगा। क्वार्टर का तीन हजार से लेकर सात हजार रुपये किराया वसूला जा रहा है। इससे पूर्व रेलकर्मी हर माह लाखों की कमाई कर रहा है।
यह बात भी दीगर है कि रेलवे कॉलोनियों में अवैध रूप से रहने वाले लोगों को निकालने के लिए रेलवे अभियान चलाता है। मौके पर जाकर पानी व बिजली कनेक्शन काट दिया जाता है। पर, जैसे ही अभियान खत्म होता है तो किरायेदारी का धंधा फिर शुरू कर दिया जाता है।
पंजाबनगर रेलवे कॉलोनी के आवासों को किराये पर उठाने का मामला संज्ञान में आया है। पूर्व रेलकर्मी खाली पड़े आवासों को अवैध रूप से किराये पर उठा रहा है। मामले की गहन जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। - संजय त्रिपाठी, डीआरएम, उत्तर रेलवे