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UP: 'दाऊद पाकिस्तान में हो या किसी और देश में...' मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त बोले- छिप नहीं सकती मरने की खबर

Mon, 15 Dec 2025 09:43 AM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

मेटाफर लिटफेस्ट के दूसरे व अंतिम दिन किस्से, कहानियों और कविताओं के बीच संस्कृति, साहित्य, सिनेमा, अध्यात्म, पुस्तकों, क्राइम, अंडरवर्ल्ड व गोमती जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। सत्र में मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त ने अंडरवर्ल्ड और आतंकवाद पर चर्चा की। लखनऊ के 250 वर्षों के इतिहास पर चर्चा के साथ ही यहां की तहजीब, जुबान और खानपान पर भी बात हुई।
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मेटाफर लिटफेस्ट मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त राकेश मारिया - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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राजधानी लखनऊ में आयोजित मेटाफर लिटफेस्ट मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त राकेश मारिया ने कहा कि माफिया डॉन दाऊद इब्राहिम पाकिस्तान में हो या किसी और देश में, लेकिन उसके मरने की खबर बहुत दिनों तक छिपाई नहीं जा सकती। 

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अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने कहा कि आतंकवाद को लेकर यह भ्रम नहीं करना चाहिए कि केवल वही लोग आतंकवाद की राह पकड़ रहे हैं जो अशिक्षित या कम पढ़े-लिखे हैं, पिछले दिनों की कई घटनाएं बताती हैं कि इंजीनियर और डॉक्टर तक ब्रेन वॉश के बाद आतंक की राह पकड़ रहे हैं, जो अधिक खतरनाक है।

....वरदराजन मुंबई वापस न लौटे

इससे पहले उन्होंने सत्यासरन के साथ बातचीत में अपनी पुस्तक 'व्हेन इट ऑल बिगन' पर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने अंडरवर्ल्ड के माफिया हाजी मस्तान से लेकर वरदराजन मुदलियार, करीम लाला और दाउद इब्राहिम व उनके गिरोहों के बारे में कई रोचक किस्से बताए। उन्होंने बताया कि उन्हें यह सुनिश्चित करने के लिए तैनात किया गया था कि वरदराजन मुंबई वापस न लौटे। 

आलमजेब और शहजादा के नेतृत्व वाला पठान गिरोह, दाउद के सूत्र और उसके पिता कांस्टेबल इब्राहिम कास्कर के अलावा मारिया ने मुंबई पुलिस की 1982 में हुई पहली मुठभेड़, 1986 में चार्ल्स शोभराज की गिरफ्तारी जैसे महत्वपूर्ण क्षणों के बारे में भी बताया और कहा कि कैसे इन घटनाओं ने अंडरवर्ल्ड में सत्ता के संतुलन को बदल दिया।

लखनऊ की जीवनरेखा है गोमती : दीपिका चतुर्वेदी

गोमती संवाद में समाजसेविका दीपिका चतुर्वेदी ने कहा कि गोमती सिर्फ एक नदी नहीं है बल्कि यह लखनऊ की जीवनरेखा है। यहां के लोग गोमती को एक जीवित प्राणि और स्तुति के पात्र के रूप में देखते हैं। उन्होंने एक फिल्म भी बनाई है, जिसमें गोमती उद्गम के बारे में विस्तार से दिखाया गया है। यह नदी 960 किलोमीटर तक फैली है। 

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उन्होंने गोमती के संरक्षण और विकास के लिए निकाली गई पदयात्रा को याद करते हुए लोगों से अपील की कि वे गोमती को बचाने के लिए आगे आएं। गोमती रिवरफ्रंट के हालिया विकास से लेकर लखनऊ के पुराने हिस्से तक के पसंदीदा गोमती स्थलों को भी साझा किया।
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