लखनऊ। केजीएमयू के एनाटॉमी विभाग में शुक्रवार को 23 वर्षीय मल्टी-डिसएबल्ड युवक अग्रिम सत्यार्थी के परिजनों ने उनकी देह का दान कर मानव सेवा की बड़ी मिसाल पेश की। अग्रिम का चार दिसंबर को निधन हो गया था। उनके पिता एवं पूर्व अपर परिवहन आयुक्त पुष्प सेन सत्यार्थी ने कहा कि अगर हमारे बच्चे की वजह से किसी की जान बच सके और डॉक्टर बेहतर प्रशिक्षण पा सकें, तो इससे बड़ी सेवा कोई नहीं हो सकती।
अग्रिम की माता डॉ. नीलू सत्यार्थी और पिता ने बताया कि 2018 में उनके दादा की देह भी लोहिया संस्थान में दान की गई थी। उन्होंने कहा कि कई बार परिजन या रिश्तेदार विरोध करते हैं, लेकिन मानव कल्याण और चिकित्सा शिक्षा के लिए यह कदम बेहद आवश्यक है।-
केजीएमयू एनाटॉमी विभाग के अध्यक्ष डॉ. नवनीत ने बताया कि विभाग को साल भर में करीब 50 देह ही दान में मिल पाती हैं, जबकि यहां हर वर्ष 3,000 से 4,000 डॉक्टर प्रशिक्षण लेने आते हैं। इनमें 150-200 विदेशी डॉक्टर भी शामिल होते हैं, जिनमें सर्वाधिक छात्र अफ्रीकी देशों से आते हैं। उन्होंने कहा कि देहदान के जरिये डॉक्टर नई तकनीकों का अभ्यास कर पाते हैं और चिकित्सा क्षेत्र में शोध व नवाचार की राह खुलती है। लेकिन धार्मिक मान्यताएं और जागरूकता की कमी अब भी इस प्रक्रिया में बड़ी बाधा है।