जून माह में गंगा में आई बाढ़ से जंगलों और नदी तटों से भारी मात्रा में बहकर आई लकड़ी की बड़ी-बड़ी डाटें दो महीने बाद भी तीर्थनगरी और आसपास के गंगा तटों पर पड़ी हैं।
उफनती गंगा में अभी भी लकड़ी की डाटें बहकर आ रही हैं। मगर विभाग इस वन संपदा के प्रति गंभीर नहीं है।
लोग उठा कर बेच रहेलिहाजा नदी तटों पर जमा लकड़ी को लोग चिरान कर निजी उपयोग या फिर बेचने के लिए ले जा रहे हैं। लाखों की वन संपदा लुट चुकी है और बचीखुची लूटी जा रही है, मगर सरकारी विभागों को इससे हो रहे राजस्व के नुकसान से कोई लेना देना नहीं है।
पहले होता था ठेकादरअसल, अभिभाजित उत्तरप्रदेश के समय वर्षाकाल में बहकर आने वाली वन संपदा, पेड़ पौधे और लकड़ी की डाटों के लिए नदी तटीय इलाकों में वन विभाग बहती का ठेका करता था।
उक्त कार्य जिला स्तर पर जंगलात के अधिकृत ठेकेदारों को दिया जाता था। इसकी एवज में विभाग उनसे रॉयल्टी वसूल करता था।
राजस्व की हानीमगर राज्य बनने के बाद से प्रदेश सरकार ने बरसात में बहने वाली वन संपदा से राजस्व लेने पर गौर नहीं किया। जिससे अब तक हर साल लाखों की इमारती लकड़ी खुर्दबुर्द हो रही है।
विभाग अभी भी नदी तटों पर जमा लकड़ी की डाटों के प्रति गंभीर नहीं है, जिसके कारण लक्ष्मणझूला, स्वर्गाश्रम, मायाकुंड, त्रिवेणीघाट आदि इलाकों में नदी तटों पर जमा लकड़ी को लोग उठाकर ले जा रहे हैं।
विभाग गंभीर नहींइससे सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता डा. नारायण सिंह रावत का कहना है कि विभाग को इसे गंभीरता से लेना चाहिए। बाढ़ से वन संपदा का नुकसान तो हुआ ही राजस्व भी नहीं मिल पा रहा है।
अफसरों की सुनिएविभाग द्वारा बहकर आई लकड़ी का लॉट निगम को आवंटित कर दिया गया है। उसका उठान करना निगम का काम है।-राजमणी पांडेय, डीएफओ पौड़ी
बहकर आई लकड़ी पर वन विभाग का अधिकार होता है, वही निगम को आवंटन करता है, जिसके एवज में विभाग को रायल्टी दी जाती है। हमारे क्षेत्र में तटीय इलाकों में बहकर आई लकड़ी का उठान कर लिया गया है, हो सकता है दूसरे क्षेत्रों में अभी नहीं हो पाया है। इससे निश्चित तौर पर राजस्व का नुकसान है।-भार्गवाचार्य, डीएलएम पौड़ी
वास्तव में इससे राजस्व का नुकसान होता है। वनविभाग द्वारा वनविकास निगम को बाढ़ में आई लकड़ी का लॉट बनाकर दे दिया गया था, यदि निगम द्वारा घाटों पर जमा लकड़ी छोड़ दी गई है तो उसे दिखवाया जाएगा। दोबारा लॉट बनाकर उठान कराया जाएगा।-भरत सिंह, एडीएफओ देहरादून
बहती का ठेका उत्तरप्रदेश के समय होता था, वर्तमान में क्या व्यवस्था है इसे दिखवाया जाएगा। जो भी प्रक्रिया होगी, उसी के तहत गंगा तटों पर जमा डाटों का उठान कराया जाएगा।-डा. विनय कुमार भार्गव, डीएफओ नरेंद्रनगर वन प्रभाग