लखनऊ। कन्नौजी बोली के प्रचार-प्रसार और संवर्धन के लिए कन्नौजी बोली समूह की ओर से परिचर्चा का ऑनलाइन आयोजन किया गया। इसका विषय ‘कन्नौजी की सामयिकता : शैक्षिक संदर्भ’ रहा। मुख्य वक्ता डॉ. रश्मि शील ने कहा कि लोकभाषा लोकजीवन का दस्तावेज होती है। उन्होंने कन्नौजी बोली में व्याप्त विविधताओं और अवधी से उसके जुड़ाव को रेखांकित किया। डॉ. अजय प्रजापति ने कहा कि कन्नौजी बोली को परीक्षोन्मुख नहीं बल्कि जीवनोन्मुख होना चाहिए। डॉ. वीरेंद्र कुमार चंद्रसखी, सुमन पाठक, डॉ. प्रखर दीक्षित, पारस सैनी, डॉ. महेश मधुकर, अखंड प्रताप सिंह, अशोक धनुषिक, सुमित कुमार और सुनील दत्त ने भी विचार रखे।