देशज में प्रस्तुति देतीं लोकगायिका मालिनी अवस्थी।
लखनऊ। बांसुरी की धुन और शंखनाद से गूंजी देशज उत्सव की अंतिम शाम कला प्रेमियों के उत्साह से भरी नजर आई। मध्य प्रदेश का मटकी लोकनृत्य हो या असम का भाओना, अवध की धरती पर लोककलाओं का महाकुंभ देखने को मिला।
राम मनोहर लोहिया पार्क में सजे देशज लोक उत्सव में कार्यक्रम की शुरुआत लोकगायिका संगीता राय के गंगा मइया... और चलो मन यमुना के तीर... के साथ हुई। इसके तहत 18 महिलाओं ने कुंभ के आमंत्रण पर अवधी गीत गुनगुनाया। इसके बाद कुंभ पर आधारित तीन मिनट की शॉर्ट फिल्म का दर्शकों ने आनंद लिया। उत्तर प्रदेश के संस्कृति एवं पर्यटन विभाग के प्रमुख सचिव मुकेश मेश्राम ने असम से आए कलाकारों को भाओना नृत्य की प्रस्तुति के लिए सम्मानित किया।
मनोज झाला के निर्देशन में हरियाणा के प्रसिद्ध घूमर नृत्य की प्रस्तुति ने देशज प्रांगण में रंग जमा दिया। यह नृत्य धान की फसल कटाई के बाद किसान समाज की खुशी को व्यक्त करता है। इसके बाद हाथरस शैली पर आधारित पद्मश्री पं. राम दयाल शर्मा की ओर से सुल्ताना डाकू पर आधारित नौटंकी प्रस्तुत की गई तो दर्शकों की तालियां बजती रहीं। 20 मिनट की प्रस्तुति में कलाकारों ने गागर में सागर भरने का काम किया। मालिनी अवस्थी ने सभी कलाकारों से परिचय कराया। उन्होंने कहा कि नौटंकी आज भी पुराने दौर की असली सिनेमा है और इसके जरिए पात्रों को जीवंत करने का प्रयास किया गया है।
पर्यटन सचिव ने नौटंकी विधा को संरक्षित करने के लिए पांच लाख की धनराशि देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह राशि जल्द ही संस्था को स्वीकृत की जाएगी। बुंदेलखंड की युद्धकला प्रदर्शित करने वाले लोकनृत्य पाई डंडा की प्रस्तुति 51 कलाकारों के साथ रमेश पाल के निर्देशन में की गई। कलाकारों ने गेरुआ रंग के परिधान में ढोल पर डंडा लेकर नृत्य करते हुए दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
नंदेश उपम ने मराठी गीतों से सजाई शाम
सुन सुन माझी वात रे कान्हा... के जरिये कान्हा और गोपियों के बीच छेड़छाड़ के प्रसंग को सुरों में पिरोने वाले मराठी गायक नंदेश उपम की प्रस्तुति ने देशज की शाम को और भी सुरमयी बना दिया। उन्होंने लखनऊ पर स्वरचित रचना गाकर दर्शकों की खूब वाहवाही लूटी। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी के निदेशक शोभित नाहर, लोककला एवं जन जातीय संस्थान के निदेशक अतुल द्विवेदी, क्षेत्रीय ललित कला अकादमी के सचिव देवेंद्र त्रिपाठी उपस्थित रहे।