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फ्लिप क्लास रूम व वर्चुअल लैब समय की मांग : राज्यपाल

Sun, 11 Apr 2021 09:36 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ

सार

- इंटीग्रल यूनिवर्सिटी द्वारा नैक से जुड़ी बैठक को राज्यपाल ने किया ऑनलाइन संबोधित
- कहा, अपने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करें शिक्षण संस्थान
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राज्यपाल आनंदी बेन पटेल। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कोरोना वैश्विक महामारी ने आज ई-कंटेंट और डिजिटल शिक्षा के महत्व को बढ़ाया है। हमें डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की प्रेरणा दी है। अब समय फ्लिप क्लास रूम व वर्चुअल लैब का है। यह सब समय की मांग है। इससे विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा मिलेगी। शिक्षक भी खुद को अपग्रेड करते रहेंगे तो समाज में एक नया परिवर्तन देखने को मिलेगा।

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यह बातें राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने रविवार को राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) व इंटीग्रल विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ऑल इंडिया एनालिसिस ऑफ एक्रिडिटेशन रिपोर्ट से जुड़ी दूसरी जोनल मीटिंग को ऑनलाइन संबोधित करते हुए कहीं। कार्यक्रम में उत्तर भारत के आठ राज्यों के प्रतिनिधि शामिल हुए। उन्होंने कहा कि पठन-पाठन के तरीकों पर लगातार शोध करते रहने की जरूरत है, जिससे विपरीत हालात में भी विद्यार्थियों की पढ़ाई किसी प्रकार से बाधित न होने पाए। 

राज्यपाल ने कहा कि वैश्वीकरण के युग में शिक्षण संस्थानों के समक्ष स्वयं को वैश्विक स्तर पर स्थापित एवं प्रस्तुत करने की बड़ी चुनौती है। उच्च शिक्षा में गुणवत्ता, उत्कृष्टता के साथ-साथ प्रासंगिकता का भी मूल्य बढ़ा है। वैश्विक स्तर पर उच्च शिक्षण संस्थानों की मूल्यांकन के लिए क्यूएस रैंकिंग, टाइम्स रैंकिंग तथा इसी प्रकार की कई अन्य रैंकिंग इकाइयों द्वारा मूल्यांकन की व्यवस्थाएं दी गई हैं। उन्होंने कहा कि जब उच्च शिक्षण संस्थान अपना मूल्यांकन करता है तो वह राष्ट्रीय विकास में योगदान देता है।
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कार्यक्रम में प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. दिनेश शर्मा, राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद के निदेशक डॉ. एससी शर्मा, प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा मोनिका एस गर्ग, इंटीग्रल विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रो. सैयद वसीम अख्तर, कुलपति प्रो. जावेद मुसर्रत, दूरस्थ शिक्षा के पूर्व निदेशक प्रो. सुमित प्रसाद पानी तथा विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि ऑनलाइन जुड़े।

सामाजिक समस्याओं के समाधान के लिए आगे आएं
राज्यपाल ने कहा कि उत्तरप्रदेश में पचास हजार से अधिक महाविद्यालय हैं। अगर एक-एक कॉलेज एक-एक गांव गोद लें और उसके विकास पर ध्यान दें तो गांव से कुपोषण, क्षयरोग, कुरीतियां, बाल विवाह आदि का शीघ्र समापन हो सकता है। साथ ही वे शिक्षा का प्रसार, स्वच्छता, जल संचयन, गर्भवती महिलाओं का प्रसव अस्पतालों में ही कराने आदि पर कार्य करें। इसी प्रकार कृषि से जुड़े महाविद्यालय कृषकों की समस्याओं का समाधान करने और किसान उत्पादक संगठन को मजबूत करने आदि पर भी कार्य कर सकते हैं।

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