बिना डिमांड सर्वे के कमीशनबाजी के चक्कर में आवास विकास ने प्रदेश में 9 हजार ऐसे फ्लैट बना डाले जिनके खरीदार नहीं मिल रहे। वक्त बीतने के साथ अब इन फ्लैटों की मरम्मत की चिंता सताने लगी है। इसके खर्चे से बचने के लिए आवास विकास परिषद अब इन फ्लैटों की कीमत कम करेगा।
इसके लिए कमेटी बनाई गई है जो रिपोर्ट देगी कि कीमतों में कमी कैसे की जाए? प्रमुख सचिव आवास विकास की अध्यक्षता में सोमवार को हुई परिषद की बैठक में इस सम्बंध में प्रस्ताव पास किया गया।
आवास विकास की प्रदेश भर में करीब 11 हजार ऐसी संपत्तियां हैं जो बिक नहीं रहीं। इनमें 9000 फ्लैट हैं, जिनका निर्माण पिछले छह सालों में हुआ है। ये फ्लैट सालों से खड़ें हैं, लेकिन उन्हें खरीदने वाला कोई नहीं। लखनऊ की वृंदावन और अवध विहार योजना में ही अकेले 3000 फ्लैट खाली पड़े हैं।
आवास विकास परिषद के अध्यक्ष नितिन रमेश गोकर्ण का कहना है, ‘यदि फ्लैट नहीं बिके तो वे जर्जर हो जाएंगे। उनकी मरम्मत करानी पड़ेगी। वैसे भी बने मकान- फ्लैट की कीमत साल दर साल घटने लगती है। इसलिए जरूरी है कि फ्लैट बनकर खड़े हैं उनको कीमत कम करके बेचा जाए।’