महिला ने बताया कि आसिफ ने ही नाका थानाक्षेत्र के एक होटल में उसकेठहरने का इंतजाम किया था। भाषा की समस्या होने के बारण दोनों के बीच कम ही बातचीत हो रही थी। बृहस्पतिवार रात करीब 10.45 बजे महिला किसी काम से होटल से निकली और रास्ता भटक गई। इसी बीच महिला के परिवारीजनों का कॉल आ गया।
परिवारीजनों से बातचीत के दौरान उसने रास्ता भटकने की बात कही। इस पर पुलिस से संपर्क करने को कहा। महिला सीधे चारबाग रेलवे स्टेशन पर जीआरपी थाने गई। पुलिस को उसकी भाषा समझ में नहीं आई तो महिला कांस्टेबल के साथ उसे रात में आशा ज्योति केंद्र भेज दिया गया।
दो दिन की काउंसलिंग, कैंटीन संचालक ने निभाया दुभाषिए की भूमिका
त्रिपुरा की महिला बांग्ला में बातचीत कर रही थी। इसके कारण काफी दिक्कतें हो रही थीं। इसी बीच काउंसलर और पीड़िता की बातचीत कैंटीन संचालक सुन रहा था। उसने बांग्ला भाषा में पीड़िता से बातचीत शुरू की तब पूरा मामला सामने आया। इस पर महिला के परिवारीजनों से बातचीत की गई। उनको लखनऊ पहुंचने को कहा गया। रविवार देर शाम को महिला के परिवारीजन लखनऊ पहुंचे। उनका भी बयान दर्ज कराया गया।
महिला है तस्कर गिरोह की सरगना
पीड़िता के भाई ने बताया कि गिरोह की सरगना त्रिपुरा की ही रुमाना है। चार अप्रैल को बहन से बातचीत हुई तो उसके लखनऊ में होने की जानकारी मिली। इसकी जानकारी होने पर गिरोह की सरगना की करीबी एक अन्य महिला ने उसे लखनऊ नहीं आने के लिए धमकाया।