लखनऊ। बैंक से धोखाधड़ी करके फर्जी कागजों के जरिये वाहन व मकान का ऋण स्वीकृत करने के आरोपी कानपुर के लाल बंगला स्थित बैंक ऑफ इंडिया के तत्कालीन वरिष्ठ प्रबंधक नरेश चंद्र भारद्वाज, साधना दीक्षित, रामजी शुक्ला, जितेंद्र श्रीवास्तव एवं प्रेम प्रकाश को दोषी ठहराकर सीबीआई कोर्ट के विशेष न्यायाधीश ने तीन-तीन वर्ष की कैद की सजा सुनाई है। सभी को कुल चार लाख रुपये के जुर्माने से भी दंडित किया है।
कोर्ट में सीबीआई की ओर से बताया गया कि बैंक ऑफ इंडिया के जोनल मैनेजर ने मामले की शिकायत सीबीआई से की थी। इस पर जनवरी 2008 को सीबीआई ने नरेश चंद्र भारद्वाज के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इसमें कहा गया कि 17 जुलाई 2006 से 26 अक्तूबर 2006 के दौरान आरोपी सीनियर मैनेजर ने विक्रम दीक्षित व लोगों से साठगांठ और साजिश करके फर्जी दस्तावेज के आधार पर तीन होम लोन और ऑटो लोन स्वीकृत किए थे। इससे बैंक को लगभग 41.50 लाख रुपये का नुकसान हुआ था। सीबीआई की विवेचना के दौरान पता चला कि जिन व्यक्तियों के नाम लोन स्वीकृत किया गया था वे नाम फर्जी थे। सीबीआई ने विवेचना के बाद सभी आरोपियों के खिलाफ 26 अप्रैल 2010 को कोर्ट में चार्जशीट दायर की थी।