24 अगस्त को देश में कोरोना वायरस के कारण लगाए गए पहले जनता कर्फ्यू के बाद लॉकडाउन के पांच महीने पूरे हो रहे हैं। पहले लॉकडाउन लगा और अब अनलॉक की प्रक्रिया शुरू हो गई है। अब अलग-अलग शहरों में सिर्फ उन्हीं इलाकों को कंटेनमेंट घोषित किया गया है जहां कोरोना संक्रमित पाए जा रहे हैं।
इन पांच महीनों में लखनऊ शहर के नजारे पूरी तरह बदल चुके हैं। जो शहर अपनी शाम और भोजन को लेकर पूरी दुनिया में जाना जाता था वहां अब शामें उतनी गुलजार नहीं होती हैं। लजीज पकवानों की जिन दुकानों पर भीड़ लगती थी वो अब बंद हैं।
शहर के बाजार, पार्क, ऐतिहासिक स्थल, प्रसिद्ध मंदिर, युवाओं के अड्डे मरीन ड्राइव और गोमती रिवर फ्रंट पर अब न तो पहले की तरह चहल-पहल है और न ही मौज-मस्ती।
कोरोना ने लोगों को घरों तक ही सीमित कर दिया है। दुकानदारों का कहना है कि वीकेंड को लगने वाला लॉकडाउन एक ब्रेक का काम करता है। जो कि सप्ताह के पांच दिन बढ़ने वाले व्यापार को अंतिम दो दिनों में रोक देती है।
आइये तस्वीरों में देखते हैं पांच महीने बाद अब क्या हैं शहर के हालात:
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जनता कर्फ्यू
- फोटो : amar ujala
ये राजधानी लखनऊ के हजरतगंज इलाके का पांच महीने पहले का दृश्य है। ये इलाका हमेशा ही लोगों से गुलजार रहता था। यहां शॉपिंग एरिया होने के साथ ही यहां की गंजिंग का एक अलग ही क्रेज रहा है।
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जनता कर्फ्यू
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लॉकडाउन खत्म होने के बाद अब इस इलाके में दिन में ट्रैफिक तो नजर आता है पर शाम होते- होते लोग छंटने लगते है। वीकेंड में लगने वाला लॉकडाउन यहां सूनापन लाता है।
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जनता कर्फ्यू
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ये दृश्य लखनऊ के अमीनाबाद इलाके का है। लखनऊ का प्रमुख शॉपिंग एरिया होने के कारण आम दिनों में यहां पैर रखने तक की जगह मुश्किल से मिलती थी।
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जनता कर्फ्यू
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अब अमीनाबाद के बाजारों में कम ही भीड़ होती है। अब यहां पहले की तरह रौनक नहीं है। कारोबारियों का कहना है कि पहले की तरह व्यापार का माहौल बनने में समय लगेगा।
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अमीनाबाद इलाके का एक दृश्य।
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जनता कर्फ्यू
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यह दृश्य लखनऊ के बड़े इमामबाड़े का है। ऐतिहासिक महत्व होने के कारण यहां हर रोज हजारों की संख्या में पर्यटक आते थे।
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जनता कर्फ्यू
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पिछले पांच महीने से यहां ताला लगा हुआ है। हमेशा गुलजार रहने वाली यह इमारत अब सुनापन झेल रही है।
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यह लखनऊ के प्रसिद्ध मनकामेश्वर मंदिर का दृश्य है। लॉकडाउन के पहले यहां श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता था।
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जनता कर्फ्यू
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लॉकडाउन लागू होने के कारण अब यहां कम ही संख्या में श्रद्धालु आते हैं और बाहर से ही दर्शन कर चले जाते हैं।
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ये लखनऊ के एक अन्य मंदिर हनुमान सेतु का दृश्य है। यहां श्रद्धालुओं की लंबी लाइन लगती थी।
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जनता कर्फ्यू
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इस बार ज्येष्ठ के बड़े मंगल पर भी आम दर्शनार्थियों के लिए बंद रहा। हालांकि, पुजारियों ने मंदिर के अंदर सुबह-शाम आरती की।
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अपने निर्माण के बाद से ही लखनऊ का जनेश्वर मिश्र पार्क लोगों ने लिए एक हॉलीडे डेस्टिनेशन बन गया। यहां हर रोज बड़ी संख्या में लोग आते थे।
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कोरोना काल के दौरान यहां बहुत कम शहरी नजर आए। धीरे-धीरे पार्क खुलने के बाद भी पर्यटकों की पहले वाली संख्या नजर नहीं आ रही है।
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लखनऊ के रिवर फ्रंट का एक दृश्य। जो कि अब निर्जन ही नजर आता है।
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लखनऊ का चिड़िया घर हमेशा ही गुलजार रहता था। अवकाश के दिनों में तो यहां मेले जैसा माहौल हो जाता था।
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जनता कर्फ्यू
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पर लॉकडाउन और अनलॉक के दौरान यह क्षेत्र निर्जन ही नजर आता है।
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लखनऊ का सहारागंज मॉल लॉकडाउन में पूरी तरह बंद रहा जबकि अनलॉक में भी पहले की तरह गुलजार नहीं हो पाया है।
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वीकेंड लॉकडाउन पर सहारागंज मॉल कुछ इस तरह नजर आता है।