प्रदेश सरकार ने अध्यादेश के जरिये अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के गठन का फैसला तो कर लिया लेकिन आयोग में चेयरमैन व सदस्यों की नियुक्ति पर चुप्पी साध ली। नतीजा ये है कि समूह ‘ग’ की करीब पांच लाख नौकरियों के लिए भर्तियां शुरू नहीं हो पा रही हैं। अगर सरकार ने इनकी सुधि ली तो बड़े पैमाने पर भर्तियां होंगी।
अधीनस्थ सेवा चयन आयोग पिछली बसपा सरकार के समय से ही भंग चल रहा था। सपा सरकार ने सत्ता में आने के बाद इसकी बहाली की कोशिशें शुरू की। इसके लिए दो बार अध्यादेश लाया गया। इसमें एक चेयरमैन व आठ सदस्यों की नियुक्ति का प्रावधान है।
गौर करने वाली बात है कि अध्यादेश तभी लाए जाते हैं जब इसकी तत्काल आवश्यकता हो और विधानमंडल सत्र आहूत न हो पा रहा हो। सरकार ने आयोग की तात्कालिक आवश्यकता स्पष्ट करते हुए कहा था कि अधिकतर विभागों में समूह ग के बड़ी संख्या में पद रिक्त हैं। इन पर तेजी से भर्ती की जरूरत है।
रिक्त पदों की संख्या के मद्देनजर लोक सेवा आयोग तमाम प्रयासों के बावजूद आवश्यक संख्या में भर्ती नहीं कर पा रहा है। पर, सरकार अब तक चेयरमैन व सदस्यों का चयन नहीं कर सकी है। इस वजह से भर्तियां शुरू नहीं हो पा रही हैं।
आयोग के चक्कर में उलझी भर्तियां
कई विभागों ने अपने यहां समूह ‘ग’ की भर्तियां इसलिए स्थगित कर दीं क्योंकि इस आयोग का गठन इसी समूह की भर्तियों के लिए किया गया है।
पंचायतीराज में ग्राम पंचायत अधिकारी, ग्राम्य विकास विभाग में ग्राम विकास अधिकारी जैसे पद समूह ग के हैं। यहां एक साल पहले रिक्त पदों के लिए आवेदन लिए जा चुके हैं। मगर भर्ती नहीं हो रही है।
विभागों से पूछने पर अधिकारी यह कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं कि पहले यह तो तय हो कि ये पद जिले स्तर के होेने की वजह से मौजूदा व्यवस्था में ही रहेंगे, या समूह ग के होने की वजह से आयोग भर्ती करेगा।
वन विभाग, समाज कल्याण सहित अन्य विभाग भी भर्तियों का इंतजार कर रहे हैं। राजस्व विभाग में लेखपाल पद के लिए भर्ती की जानी है। यह विभाग भी इसी उलझन में है कि वह परंपरागत तरीके से भर्ती करे या आयोग से कराए।
इन आयोगों को भी मुखिया का इंतजार
1. राज्य विधि आयोग : प्रदेश सरकार ने जनवरी में राज्य विधि आयोग के गठन का फैसला किया था। इसमें एक अध्यक्ष, एक पूर्णकालिक व एक अंशकालिक सदस्य तथा एक सचिव की नियुक्ति की जानी है।
आयोग का काम न्यायालयों में लंबित मुकदमों के निस्तारण में विलंब केकारणों की पड़ताल, उसके समाधान, जनता को तेजी से न्याय दिलाने, न्यायिक प्रक्रिया में सुधार तथा प्रदेश की आवश्यकताओं के लिहाज से मौजूदा कानूनों में संशोधन तथा उन्हें और प्रभावी बनाने पर सरकार को राय देना है। सरकार इस आयोग में भी अध्यक्ष व सदस्यों का चयन नहीं कर पाई है।
2. बाल अधिकार संरक्षण आयोग: प्रदेश सरकार ने बाल अधिकार संरक्षण आयोग का गठन किया था। इसमें एक अध्यक्ष और छह सदस्यों की नियुक्ति की जानी है लेकिन अभी तक ये नियुक्तियां नहीं की जा सकी हैं। फिलहाल, आयोग का कामकाज शुरू करने के लिए तत्काल प्रभाव से प्रमुख सचिव महिला कल्याण को आयोग के अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंप दी गई है।
3. राज्य सूचना आयोग: राज्य सूचना आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त का पद पिछले तीन महीने से खाली है। सरकार अब तक दो बार सीआईसी चयन के लिए बैठक बुला चुकी है। मगर, दोनों ही बार बैठकें स्थगित कर दी गईं।