प्रभारी निरीक्षक हजरतगंज श्याम बाबू शुक्ला के मुताबिक, इस गिरोह में दो महिलाएं हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दोनों फर्जी तरीके से कई नामों से आईडी बनाती हैं। इसके बाद चिह्नित लोगों से दोस्ती करती हैं। उनसे चैटिंग करने के दौरान मोबाइल नंबर हासिल कर लेती हैं। फिर उनसे बातचीत का सिलसिला शुरू करती हैं। इस दौरान वीडियो कॉलिंग और चैटिंग भी होती है। महिलाएं अपने जाल में फंसाने के लिए वीडियो कॉलिंग के दौरान अश्लीलता भी करती हैं। इस दौरान उनके साथी दूसरे मोबाइल से वीडियो भी बनाते हैं। इसके बाद मुलाकात का सिलसिला शुरू होता हैं। जाल में फंसे पुरुषों को महिलाएं मिलने केलिए महंगे होटल व रेस्टोरेंट में बुलाती हैं। इस दौरान उसी होटल में उनके पुरुष साथी भी मौजूद रहते हैं।
अपने ठिकाने पर बुलाकर वीडियो व फोटो बनाते थे
एसएसआई अमरनाथ यादव केमुताबिक, इस गिरोह ने सरोजनीनगर में अपना ठिकाना बनाया है। उनके अनुसार, होटलों व रेस्टोरेंट में मुलाकात करने के बाद महिला अकेले में मिलने व अंतरंगता के लिए न्योता देती हैं। इसके लिए महिला अपने ठिकाने पर ही पुरुषों को बुलाती हैं। इस दौरान अश्लील तस्वीरें व वीडियो बना लेते हैं। कुछ देर में बाद पुरुष व दूसरी महिला वहां पहुंचकर दोनों को फटकार लगाती हैं। इसके बाद रकम वसूली का खेल शुरू होता है।
पुलिसकर्मी बनकर जेल भेजने की देते हैं धमकी
अतिरिक्त निरीक्षक अनिल कुमार सिंह के मुताबिक महिलाओं के ठिकाने से किसी तरह निकलने के बाद पुरूष खुद को बचा महसूस करता है। लेकिन एक-दो दिन के बाद ब्लैकमेल करने का सिलसिला शुरू होता है। गिरोह के पुरूष सदस्य पुलिसकर्मी बनकर झांसे में आए पुरूष को कॉल करते हैं। उसके खिलाफ तहरीर देने की बात कहकर मिलने के लिए बुलाते हैं। इस दौरान विवाद खत्म कराने के नाम पर मोटी रकम मांगी जाती है। जिसे गिरोह आपस में बांट लेता है। अगर कोई टालमटोल करता है तो उसे जेल भेजने की धमकी दी जाती है। यहां तक गिरोह के सदस्य रकम लेने के लिए जब भी मिलते हैं। तीनों पुरूष सदस्य वर्दी पहने रहते हैं। सोमवार को भी दो पुरूष सदस्य दरोगा व एक सिपाही की वर्दी में मिला।
प्रभारी निरीक्षक श्याम बाबू शुक्ला के मुताबिक इस गिरोह के सभी सदस्य स्नातक कर चुके हैं। सभी लखनऊ के नामी कालेज व लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र रहे। इस गिरोह का मास्टर माइंड अजीजुल हसन सिद्दीकी है। वह व पंकज गुप्ता दरोगा बनते थे। वहीं अतुल सक्सेना सिपाही की भूमिका में रहता है। जो भी शिकार सामने आता था। उसे अर्दब में लेने के लिए अजीजुल हसन सिद्दीकी बातचीत के दौरान पुलिसिया अंदाज में थप्पड़ भी जड़ देता था। इसके बाद उससे आसानी से रकम वसूल लेते थे। पुलिस ने अजीजुल और पंकज को वर्दी में ही दबोच लिया।
बिल्डर, डॉक्टर व व्यापारी थे निशाने पर
पुलिस के मुताबिक इस गिरोह के निशाने पर बिल्डर, डॉक्टर और व्यापारी के अलावा निजी कंपनी में काम करने वाले अधिकारी भी शामिल थे। इन सभी से महिलाएं सोशल मीडिया के जरिए दोस्ती करती थी। इसके बाद उनको अपने ठिकाने पर बुलाकर कपड़े उतरवाने के बाद वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करती थी। पुलिस के मुताबिक शुरूआती पड़ताल में सामने आया कि इस गिरोह ने करीब 9 लोगों से वसूली की है। यह गिरोह एक शिकार से एक से 2.5 लाख रुपये तक की वसूली करता था।
दो हजार की वर्दी, लाखों की कमाई
जालसाजों ने दुकान से दो हजार रुपये में दरोगा की वर्दी खरीदी। इसमें कपड़े, स्टार व बेल्ट सभी शामिल हैं। इसके बाद गिरोह बनाकर ठगी का धंधा शुरू कर दिया। पुलिस के हाथ दो दरोगा की पूरी वर्दी, जिसमें कपड़े, बेल्ट, टोपी, स्टार व बूट भी शामिल हैं। इसके अलावा एक वर्दी की सिर्फ शर्ट मिली हैं। जालसाजों ने जिस दुकान से वर्दी खरीदी थी उस दुकानदार के बारे में जानकारी जुटाकर पूछताछ करने की तैयारी कर रही है। ताकि ऐसे फर्जी वाड़ा करने वालों को वर्दी आसानी से न बेची जा सके। पुलिस दुकानदार के खिलाफ भी कार्यवाही करने की तैयारी कर रही है।
पुलिस के मुताबिक आरोपियों के पास से मिले 6 एंड्रायड मोबाइल में कई अहम सुराग हाथ लगे हैं। इसमें कई व्यक्तियों के नग्न व अश्लील वीडियो व तस्वीरें शामिल हैं। पुलिस ने मोबाइल में मिले वीडियो व फोटो को फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है। वहीं आरोपियों से पूछताछ कर मोबाइल में मिले कई संदिग्ध नंबरों के बारे में भी जानकारी हासिल कर रही है। कुछ नंबरों के कॉल डिटेल भी निकलवाये जा रहे हैं। पुलिस को आशंका है कि इस गिरोह ने अभी तक सिर्फ 10-12 लोगों से ठगी की बात कुबूल की है। यह संख्या अधिक हो सकती है।
इस टीम ने किया खुलासा
हनी ट्रैपिंग गिरोह का खुलासा करने के लिए डीसीपी मध्य सोमेन वर्मा ने सर्विलांस सेल के प्रभारी धर्मेंद्र कुमार, एसआई संजय यादव, एसआई राहुल सोनकर, कांस्टेबल विमल पाल, दीपक तिवारी, प्रवीण, महिला कांस्टेबल चंचल यादव व कीर्ति को लगाया था। इस टीम ने सभी आरोपियों को दबोच लिया।