लखनऊ। बीमारी के लिहाज से अति संवेदनशील फैजुल्लागंज इलाके में इस बार मच्छरजनित बीमारियों के मामले बेहद कम सामने आए हैं। बाढ़ का पानी उतरने के बाद डेंगू और मलेरिया फैलने की आशंका जताई जा रही थी, लेकिन बाढ़ के पानी के साथ आईं गंबूजिया मछलियों ने मच्छरों के लार्वा को खाकर उनकी आबादी बढ़ने पर प्राकृतिक रूप से अंकुश लगा दिया। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, अब तक यहां इक्का-दुक्का मामले ही सामने आए हैं।
फैजुल्लागंज में चार वार्ड हैं, जिनमें लाखों की आबादी रहती है। बीते दिनों इलाके का बड़ा हिस्सा बाढ़ की चपेट में आ गया था। पानी उतरने के बाद गंदगी और जलभराव के चलते मच्छरों के पनपने की आशंका बढ़ गई थी। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित इलाकों में सर्वे कराया और एंटीलार्वा छिड़काव के साथ फॉगिंग भी कराई।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से अब तक डेंगू के 31 और मलेरिया के 20 मरीज ही सामने आए हैं। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि जलभराव वाले स्थानों और मच्छरों के प्रजनन स्थलों पर निगरानी जारी रखना जरूरी है।
ठंड बढ़ने से घटेगी मच्छरों की सक्रियता
सीएमओ डॉ. एनबी सिंह ने बताया कि सुबह और रात के तापमान में गिरावट आने लगी है। इससे मच्छरों की सक्रियता और प्रजनन दर में कमी आने की उम्मीद है। ठंड के कारण मच्छरों के अंडों और लार्वा का विकास प्रभावित होता है, जिससे डेंगू और मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों की संख्या घट सकती है। हालांकि, गर्म और नम जगहों पर मच्छर बने रह सकते हैं। इसलिए लोगों को घरों के आसपास पानी जमा नहीं होने देना चाहिए और मच्छरों से बचाव के उपाय जारी रखने चाहिए।
फैजुल्लागंज में पिछले महीने आई थी बाढ़।
फैजुल्लागंज में पिछले महीने आई थी बाढ़।
फैजुल्लागंज में पिछले महीने आई थी बाढ़।
फैजुल्लागंज में पिछले महीने आई थी बाढ़।
फैजुल्लागंज में पिछले महीने आई थी बाढ़।
फैजुल्लागंज में पिछले महीने आई थी बाढ़।