अटल 2003 से पहले भी सरयू तट पर आए थे, लेकिन अयोध्या के बजाय गोंडा की सीमा में। व्यावहारिक रूप से अयोध्या में, लेकिन तकनीकी तौर पर गोंडा में। हालांकि बतौर प्रधानमंत्री उन्होंने उस यात्रा में अयोध्या से गोरखपुर और पूर्वांचल को जोड़ने के लिए सरयू पर बने रेलवे पुल और रेल लाइन का उद्घाटन कर अयोध्या के सरोकार साधे थे।
सरयू पर दूसरे पुल और स्वर्णिम चतुर्भुज योजना से अयोध्या को जोड़ने का काम भी अटल ने किया। उन्होंने फैजाबाद हवाई अड्डे पर बतौर प्रधानमंत्री एक बार चुनावी सभा को भी संबोधित किया। पर, जन्मभूमि स्थल से दूर रहे। लालकृष्ण आडवाणी उपप्रधानमंत्री के रूप में अपनी भारत उदय यात्रा के दौरान जरूर इस स्थान पर गए थे।
मोदी भी इससे पहले चुनाव अभियान में बतौर प्रधानमंत्री अयोध्या आए, लेकिन नगर से बाहर सभा करके लौट गए। मतलब अयोध्या के विकास की बात हो या अन्य तरीके से सरोकार साधने की। कांग्रेस और भाजपा ने खूब प्रयास किए, लेकिन बतौर प्रधानमंत्री राम जन्मभूमि स्थल पर आने वाले मोदी पहले व्यक्ति होंगे। यही नहीं, मोदी के हाथों मंदिर की शुरुआत किसी प्रधानमंत्री के हाथों मंदिर निर्माण की शुरुआत कराने का इतिहास भी रचेगी।
योगों की ऐतिहासिकता
यह सर्वविदित है कि हनुमान जी ने खुद को भगवान राम का दास ही कहलाना पसंद किया है। लेकिन, राम-रावण युद्ध में एक तरह से उनकी भूमिका किसी सारथि और सहयोगी जैसी थी। संयोग ही है कि 1990 में लालकृष्ण आडवाणी के सहयोगी व सारथि के रूप में सोमनाथ से अय़ोध्या के लिए चले नरेंद्र मोदी दूसरी बार जब इन स्थानों पर पहुंचेंगे तो सारथि से रथी की भूमिका में आ चुके हैं।
मोदी इससे पहले 1992 में श्रीराम जन्मभूमि स्थल पर दर्शन करने आए थे, लेकिन तब भी वह सारथि की भूमिका में थे डॉ. मुरली मनोहर जोशी के साथ। अवसर था, एक विधान-एक निशान के संकल्प और जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 की समाप्ति की मांग को लेकर यात्रा का।
पांच अगस्त... तब अनुच्छेद 370, अब मंदिर निर्माण की शुरुआत...
नरेंद्र मोदी जब पहली बार 1992 में अयोध्या आए थे, तब उन्होंने कुछ लोगों के पूछने पर कहा था, दूसरी बार अयोध्या तब आऊंगा, जब मंदिर बनने की स्थितियां होंगी। संयोग देखिए कि यह काम उन्हीं के हिस्से में आया।
खास बात यह है कि मोदी यह काम शुरू करने तब आ रहे हैं, जब वह जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 की समाप्ति करा चुके हैं। उनकी उस यात्रा के दोनों संकल्पों के साकार होने की तारीख 5 अगस्त ही बनने जा रही है। 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 की विदाई हुई और इस 5 अगस्त को रामलला के मंदिर निर्माण की शुरुआत ।
सहयोगी बने मुख्य किरदार
सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही ऐसे सारथि और सहयोगी नहीं हैं, जो मंदिर निर्माण की शुरुआत के समय सहयोगी से प्रमुख किरदार की भूमिका में आ चुके हैं। महंत नृत्यगोपाल दास तब रामचंद्र परमहंस के निकटतम सहयोगी की भूमिका में थे, इस बार ट्रस्ट के अध्यक्ष के रूप में मुख्य भूमिका में होंगे। इसी तरह गोरक्षपीठ के महंत अवेद्यनाथ के उत्तराधिकारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी इस बार मुख्य भूमिका में होंगे ।