अकाउंटेंट के पद से पदावनत कर जूनियर क्लर्क बनाए जाने के वित्त विभाग के एक फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। अदालत ने इस पर सरकार से जवाबी हलफनामा दाखिल करने को कहा है।
न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान ने यह आदेश अमित कुमार श्रीवास्तव की याचिका पर दिया। सुनवाई के समय याची के वकील ज्योतिंजय वर्मा ने दलील दी कि याची को पहले जूनियर क्लर्क से सहायक लेखाकार (अकाउंटेंट) के पद पर प्रोन्नति दी गई और फिर लेखाकार बनाया गया। लेकिन वित्त विभाग ने 15 मई 2019 को शासनादेश जारी कर कहा कि जूनियर क्लर्कों को लेखाकार के पद पर प्रोन्नति दिए जाने का प्रावधान नहीं है और याची को लेखाकार के पद से वापस जूनियर क्लर्क के पद पर पदावनत कर दिया गया है।
याची के वकील की दलील थी कि वित्त विभाग ने यह आदेश राज्य सरकार के 26 फरवरी को जारी एक आदेश के परिप्रेक्ष्य में जारी किया है। वित्त विभाग ने सरकार के आदेश को ठीक से समझे बगैर ही फैसला ले लिया। याची के वकील ने बताया कि वित्त विभाग का यह आदेश जिलों में प्रोन्नत होकर ट्रेजरियों में तैनात अन्य लेखाकारों को भी प्रभावित कर रहा है।
दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने कहा कि प्रकरण विचार करने योग्य है। अदालत ने मामले की सुनवाई 22 जुलाई नियत करते हुए सरकारी वकील को दो सप्ताह में जवाबी हलफनामा दाखिल करने को कहा है। कोर्ट ने ताकीद की कि अगर निर्धारित समयावधि में जवाबी हलफनामा दाखिल नहीं किया जाता है तो अगली सुनवाई पर याची की अंतरिम राहत दिए जाने के आग्रह पर विचार किया जाएगा।