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Lucknow News: अवधी के चटखारों ने भरे कथा में रंग

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कथा रंग के पहले दिन अवधी लोक कथा सुनातीं अमिता पांडेय, नूतन वशिष्ठ और सुमन। स्वयं
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लखनऊ। अवधी बोली का लालित्य प्राचीन कथाओं के माध्यम से जब मंच पर उतरा तो सुनने और देखने वाले मुस्कुराए बगैर नहीं रह सके। छुटकी और नाग देवता नामक लोककथा के वाचन में अमिता पांडेय ने ऐसा रंग जमाया कि दर्शक अपने गांव और बचपन की यादों में खो गए। अवधी के चटखारों में लिपटी इस कथा में उनका साथ दिया नूतन वशिष्ठ और डॉ. सुमन ने।
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कथा रंग फाउंडेशन की ओर से दो दिवसीय वार्षिक कार्यक्रम रंगोत्सव का आयोजन अंतरराष्ट्रीय बौद्ध संस्थान में सोमवार से शुरू हुआ। पहले दिन कार्यक्रम की शुरुआत गणेश वंदना और मीशा व ईशा रतन के नृत्य से हुई। इसके बाद हरिशंकर परसाई के व्यंग्य ‘इंस्पेक्टर मातादीन चांद पर’ का वाचन कौंतेय जयए पुनीता अवस्थी और अंबरीष बॉबी ने किया। कौंतेय जय ने युवा रचनाकार अनुराग अनंत से साहित्य के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। कन्नौज की हास्य लोककथा ‘पंडिताइन को मूसल’ की प्रस्तुति डॉ. अपूर्वा अवस्थी और अनमोल मिश्रा ने की।

पहले दिन की अंतिम प्रस्तुति उपेन्द्र नाथ की कहानी पहेली का वाचन अनुपमा शरद, सोम गांगुली ने किया जिसमें ऋषिता प्रजापति और सोम ने अभिनय भी किया। संचालन सोम गांगुली और अनुपमा शरद ने किया। इस अवसर मुख्य अतिथि वरिष्ठ पत्रकार रहीस सिंह के अलावा कथारंग की अध्यक्ष नूतन वशिष्ठ, सचिव अनुपमा शरद, पुनीता अवस्थी, मालविका त्रिवेदी, ममता शुक्ला, डॉ. सुमन मिश्रा, अनमोल मिश्रा आदि मौजूद रहे।
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