- 25 जनवरी 2025 तक मिली थी एनओसी, एक्सपायरी से पहले ही अस्पताल प्रशासन ने किया था दोबारा आवेदन
- आपत्ति लगाकर दमकल विभाग ने कर दिया था खारिज, बिना एनओसी के हो गई मॉक डि्रल
माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। लोकबंधु अस्पताल में आग लगने की घटना ने कई पोल खोल दिए हैं। 25 जनवरी 2025 को अस्पताल की फायर एनओसी समाप्त हो गई थी। बिना एनओसी के अस्पताल में मरीजों का इलाज जारी था। मानकों के हिसाब से अस्पताल में आग से बचाव के संसाधन नहीं थे। यही वजह है कि आग लगते ही कर्मचारियों में भगदड़ मच गई। आग पर समय रहते काबू नहीं पाया गया, जिसकी वजह से पूरा अस्पताल उसकी चपेट में आ गया और मरीजों की जान पर बन आई।
इस लापरवाही के लिए जितना अस्पताल प्रबंधन जिम्मेदार है उतना ही फायर ब्रिगेड भी। दरअसल, अस्पताल की ओर से वर्ष 2022 में एनओसी के लिए आवेदन किया गया था। तीन साल के लिए उन्हें एनओसी मिली थी, जो 25 जनवरी 2025 तक मान्य थी। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि एनओसी समाप्त होने के पहले ही इसके लिए आवेदन कर दिया गया था। हालांकि, दमकल विभाग ने तीन बिंदुओं पर आपत्ति लगाकर एनओसी देने से इनकार कर दिया। दमकल विभाग ने पब्लिक एनाउंसमेंट सिस्टममी व्यवस्था करने, धुआं निकलने के लिए रास्ता छोड़ने और परिसर में जगह जगह रखे गत्तों को हटाने के बाद ही एनओसी देने पर सहमति जताई। अस्पताल की ओर से इन कमियों को दूर करने के बाद पत्राचार किया गया। दमकल विभाग की टीम ने निरीक्षण किया और फिर कुछ कमियां बता कर एनओसी नहीं दी। 27 फरवरी तक एनओसी मिलनी थी, जो आज तक नहीं मिली। उधर, अस्पताल में डेढ़ माह पहले आग लगने पर लोगों को कैसे बचाया जा सके, इसके लिए मॉक डि्रल का आयोजन भी कर दिया गया। मॉक ड्रील में कर्मचारियों, अस्पताल प्रबंधन और चिकित्सकों को आग से बचाव की जानकारी भी दी गई थी। इसके अलावा फायर ब्रिगेड ने रिहर्सल किया था। हालांकि, अस्पताल में लगी आग की घटना ने मॉक डि्रल की पोल खोल दी। आग से बचाव के उपकरण समय पर चालू न हो सके। यही नहीं, कर्मचारियों को भी उन्हें चलाने का तरीका नहीं पता था। बिना फायर एनओसी के मॉक डि्रल ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
अस्पताल की ओर से नहीं किया गया था ऑनलाइन आवेदन
फायर एनओसी के अस्पताल की ओर मौखिक और पत्राचार किया गया। हालांकि ऑनलाइन आवेदन नहीं किया गया। इसकी वजह से उन्हें एनओसी नहीं दी गई। अब सवाल ये है कि बिना एनओसी के अस्पताल संचालित करने पर दमकल विभाग ने अस्पताल को नोटिस क्यों नहीं जारी की। फायर ब्रिगेड की टीम ने पहले भी अस्पताल का निरीक्षण किया था और हाल में दोबारा जाने वाली थी।
धुएं की वजह से हुई परेशानी
फायर ब्रिगेड का कहना है कि धुएं की वजह से परेशानी का सामना करना पड़ा। धुआं निकलने का रास्ता नहीं था, जिससे आग ने विकराल रूप ले लिया। इस बीच बिजली काटी गई थी। हालांकि, अंधेरे में धुएं ने और मुश्किलें पैदा की। इसकी वजह से आग पर काबू पाने में समय लगा। अगर समय रहते अस्पताल प्रशासन ने आग से बचाव के उपकरणों को ठीक करा लिया होता तो शायद इतनी बड़ी घटना न होती।
लोहे का बैरियर बना रोड़ा
अस्पताल के मुख्य प्रवेश गेट के पास लोहे का बड़ा बैरियर लगाया गया है। गेट के बगल में पार्किंग बनाई गई है। बैरियर लगाने का मकसद वाहनों को भीतर जाने से रोकना है। हालांकि, बैरियर लगाते समय यह नहीं सोचा गया कि अगर अस्पताल में आग लगती है तो फायर ब्रिगेड के वाहन वहां से कैसे प्रवेश करेंगे। बैरियर की वजह से ही फायर ब्रिगेड के वाहन मुख्य गेट से प्रवेश नहीं कर पाए। एक वाहन तो काफी देर तक फंसा रहा। प्रशासन ने अस्पताल प्रबंधन से बैरियर लगाने को लेकर सवाल किए हैं।