लखनऊ। लोकबंधु अस्पताल में लगी आग में फंसे मरीज-तीमारदारों ने मौत को करीब से देखा है। उस भयावह मंजर को साेचकर मरीज सहम जाते हैं। कहते हैं कि आग की लपटें व धुआं वार्ड में भरने लगा तो लगा अब जान नहीं बच पाएगी। जिंदा जल जाएंगे। स्टाफ ने आग बुझाने की कोशिश की, मगर कामयाब नहीं हुए। ऐसे में परिजन अपने-अपने मरीज को गोद में उठाकर नीचे की तरफ भागे, जिसके बाद ही उनकी जान बच सकी।
बहन को बचाने में जान की बाजी लगा दी
सीतापुर रोड छठामील निवासी पलक (16) को सांस लेने में दिक्कत होने पर लोकबंधु की आईसीयू में भर्ती कराया गया था। आग लगने के समय वह ऑक्सीजन सपोर्ट पर थी। आईसीयू में भाई शिवम और बहन कविता भी थीं। भाई ने बताया धुआं उठने पर अफरातफरी मच गई। ऑक्सीजन बंद होने से बहन की सांसें उखड़ने लगीं। वह उसे गोद में लेकर बाहर की तरफ भागे। वहीं, पलक ने बताया कि ऐसा लगा कि वह उसकी आखिरी रात है। भाई ने उसे गोद में उठाकर बाहर खड़ी एंबुलेंस में लिटाया। एंबुलेंस में लगे ऑक्सीजन सपोर्ट से थोड़ी राहत मिली। बाद में उसे सिविल अस्पताल में शिफ्ट किया गया।
मां को गोद में उठाकर भागे
उन्नाव के परसैया निवासी मंजू मिश्रा (60) को भी सिविल अस्पताल में शिफ्ट किया गया है। शुगर बढ़ने पर उन्हें सोमवार को ही लोकबंधु में भर्ती कराया गया था। बेटे विपिन ने बताया कि आग लगने के बाद सब अपने मरीज को बचाने में लग गए। कोई मदद न मिलने पर वह मां को गोद में लेकर बाहर आए। आग लगने के बाद बिजली ठप हो गई। इससे हर तरफ अंधेरा था। धुएं से दम घुटने लगा। बाहर आने पर उसे एंबुलेंस के जरिये सिविल लाया गया।