स्वर्णदीप ने बताया कि उसने खुद 17 बाइक के लिए कंपनी को 10.37 लाख रुपये देकर अनुबंध किया। अनुबंध के तहत उसे 19 लाख से ज्यादा रुपये मिलने थे। लेकिन कंपनी ने महज पौने नौ लाख रुपये ही दिए। शेष करीब 10 लाख रुपये बकाया हैं। इसी तरह स्वर्णदीप के मित्र वाराणसी की गौतम विहार कॉलोनी मीरापुर बसही निवासी रविंद्र प्रताप सिंह ने एक बाइक के लिए 61 हजार रुपये कंपनी को दिए।
वाराणसी के काजीपुरा खुर्द सोनिया निवासी ज्योति चौरसिया और महमूरगंज के वीरदोपुर निवासी प्रमोद पांडेय ने 10-10 बाइक के लिए 12.20 लाख रुपये कंपनी को दिए। सारनाथ के आशापुर में रहने वाले आशीष पांडेय व उनकी पत्नी सरोज ने तीन बाइक के लिए 1.83 लाख रुपये दिए तो विनायका कमच्क्षा निवासी ओम प्रकाश पांडेय ने दो बाइक के लिए 1.22 लाख रुपये जमा किए।
कंपनी संचालकों ने कुछ महीने उपरोक्त लोगों के खातों में रुपया भेजा। बाद में रुपये मिलने बंद हो गए। पीड़ित लखनऊ स्थित ऑफिस पहुंचे तो वहां ताला लटका मिला। पूछताछ में पता चला कि जालसाजों पर प्रदेश के कई जनपदों में ठगी के शिकार हजारों लोगों ने रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस ने अभय को गिरफ्तार करके जेल भेजा था, लेकिन वह जमानत पर छूटने के बाद से लापता है। ठगी के अन्य आरोपी भी फरार हैं। पीड़ितों ने पुलिस से ठगों को गिरफ्तार करके जेल भेजने की मांग की है।
हेलो राइड कंपनी के चेयरमैन अभय कुमार कुशवाहा की ठगी के शिकार लोगों में सबसे ज्यादा दो वक्त की रोटी कमाने वाले लोग हैं। कोई ऑटो चलाता है तो कोई स्कूल वैन। किसी की पान की गुमटी है तो कोई छोटी-मोटी नौकरी करता है। लालच में अकार लोगों ने उधार लेकर या बचत का पूरा रुपया कंपनी में लगा दिया।
पुलिस ने उसे गिरफ्तार करके जेल भेजा, लेकिन तीन महीने बाद ही वह जमानत पर छूट गया। अब अभय पुलिस के हाथ से कोसों दूर निकल चुका है। पीड़ितों का यह भी कहना है कि अभय करोड़ों रुपये लेकर नेपाल अथवा किसी अन्य देश भागने की तैयारी कर रहा था। फिलवक्त वह कहां है? राजधानी की हाईटेक पुलिस यह सुराग नहीं लगा पा रही है।
चेयरमैन को गिरफ्तार कर बाकी आरोपियों को भूल गई पुलिस
विभूतिखंड पुलिस ने हेलो राइड कंपनी के चेयरमैन अभय कुमार कुशवाहा को गिरफ्तार करके खानापूरी कर ली। बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने कोई प्रयास नहीं किया। ठगी के शिकार लोगों ने अभय और उसके भाई निखिल समेत निदेशक नीलम वर्मा, राजेश पांडेय, शकील अहमद, राम जनम मौर्या, मोनिका, देवेश, गौरव वर्मा, नावेद, राहुल द्विवेदी, आयुष तिवारी और कंपनी के कैश का कामकाज संभालने वाले कानपुर के हितेश बाजपेयी समेत कई लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर कराई हैं। पुलिस उपरोक्त में से एक का भी सुराग नहीं लगा सकी है।