लखनऊ विश्वविद्यालय के व्यवहारिक अर्थशास्त्र विभाग में 13 साल पहले लेक्चरर पद की भर्ती में फर्जीवाड़े को लेकर तीन पूर्व कुलपति समेत पांच लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। अपर पुलिस आयुक्त उत्तरी राजेश कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि भर्ती के लिए आवेदन करने वाले इंदिरानगर निवासी डॉ. प्रशांत पांडेय ने फर्जीवाड़े की शिकायत की थी।
उनका आरोप है कि कविता चतुर्वेदी ने पीएचडी की फर्जी डिग्री दिखाकर नौकरी हासिल की। मामले की शिकायत करने पर पूर्व कुलपति प्रो. एसपी सिंह, पूर्व कुलसचिव एसके शुक्ल, पूर्व कुलपति प्रो. आरपी सिंह व पूर्व कुलसचिव अनिल कुमार दमेले ने कोई कार्रवाई नहीं की। उनकी तरफ से सभी आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज बनाने की धाराओं में केस दर्ज कर जांच की जा रही है।
अपर पुलिस आयुक्त उत्तरी ने बताया कि विश्वविद्यालय ने 28 मार्च 2006 में व्यवहारिक अर्थशास्त्र विभाग में लेक्चरर के पद पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। डॉ. प्रशांत ने भी उक्त पद के लिए आवेदन किया था। हालांकि, साक्षात्कार में तत्कालीन कुलपति, कुलसचिव व अन्य अधिकारियों ने गोमतीनगर के विपुलखंड में रहने वाली कविता चतुर्वेदी का चयन कर लिया।
डॉ. प्रशांत का कहना है कि सुश्री कविता लेक्चरर पद के लिए विश्वविद्यालय की नियमावली में निर्धारित योग्यताओं को पूरा नहीं करती थीं। उन्होंने आवेदनपत्र में पीएचडी की फर्जी डिग्री दिखाई, इसके बाद भी उनका चयन कर लिया गया। डॉ. प्रशांत ने विश्वविद्यालय के तत्कालीन अधिकारियों पर कविता चतुर्वेदी को फर्जीवाड़ा कर नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल कराने का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और तत्कालीन राज्यपाल से शिकायत की। वर्ष 2008 में राजभवन से कविता चतुर्वेदी की नियुक्ति को निरस्त कर दिया गया जिस पर वह कोर्ट चली गईं।
कोर्ट से भी उन्हें राहत नहीं मिली। इस बीच शिकायतकर्ता डॉ. प्रशांत पांडेय ने फर्जीवाड़े से संबंधित तमाम दस्तावेज प्रधानमंत्री कार्यालय और राजभवन को सौंपते हुए कार्रवाई की मांग की। राजभवन से विश्वविद्यालय प्रशासन को इस प्रकरण पर विचार करने के निर्देश दिए गए। डॉ. प्रशांत का कहना है कि वह कई साल तक न्याय के लिए जूझते रहे पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने कोई सुध नहीं ली। मजबूरन उन्हें पुलिस की शरण लेनी पड़ी। उन्होंने 30 अक्तूबर 2019 को हसनगंज कोतवाली में प्रार्थनापत्र दिया जिसकी जांच के बाद पुलिस ने आठ मार्च 2020 को केस दर्ज किया।