पीड़िता के वकील रिजवान अहमद ने बताया कि एसीजेएम द्वितीय ज्ञानेंद्र त्रिपाठी के निर्देश पर आशियाना थाने में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। इसमें आईपीसी की 494, 420 और 507 धाराएं लगाई हैं।
उन्होंने दावा किया कि देश में यह पहला मामला है जहां किसी मुस्लिम पर आईपीसी 494 के तहत केस दर्ज हुआ है। इस धारा में अपने वैवाहिक साथी के जीवित रहते जानबूझकर दूसरी शादी करने पर हिंदू विवाह अधिनियम 1953 के तहत केस दर्ज होता है। इसमें अधिकतम सात वर्ष की जेल होती है।
अहमद ने कहा कि मुस्लिम नागरिक इस कानून की जद में नहीं आते क्योंकि वहां पर्सनल लॉ लागू होता है। पर्सनल लॉ में बहु विवाह के लिए अपनी पत्नी से अनुमति लेनी होती है। हैदर ने मौजूदा मामले में पहली बीवी होने की जानकारी छिपाते हुए शादी की।
धोखा देकर युवती का धर्म परिवर्तन किया और तीन तलाक भी दिया। सुप्रीम कोर्ट साफ कर चुका है कि इस्लाम में विवाह एक कॉन्ट्रैक्ट है। मौजूदा मामले में यह कॉन्ट्रैक्ट मूल तथ्यों को छिपाकर धोखा देकर किया गया, इसलिए इसे शून्य करार दिया जा सकता है। यही वजह है कि एफआईआर दर्ज हो सकी।