यूपी बोर्ड इंटर की इतिहास विषय की परीक्षा छूटने पर विद्यालय दोषी करार, 49 पर दस-दस हजार रुपये का जुर्माना
जानकारी के अभाव में यूपी बोर्ड इंटर के कई छात्रों की इतिहास की परीक्षा छूट गई थी। इसके लिए बोर्ड ने जिले के 49 विद्यालयों को दोषी पाया है।
इन सभी पर 10-10 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। बोर्ड ने सभी विद्यालयों से रिकवरी कराने का निर्देश दिया है।
इंटर इतिहास के प्रश्नपत्र की परीक्षा तिथि बदले जाने पर इन विद्यालयों ने परीक्षा कार्यालय से संशोधित एडमिट कार्ड नहीं लिए थे। इस वजह से 249 छात्रों की परीक्षा छूट गई थी।
यूपी बोर्ड इंटर की इतिहास की परीक्षा पहले 28 फरवरी को सुबह की पाली में निर्धारित थी। कॉलेजों को जो एडमिट कार्ड भेजे गए थे, उस पर 28 फरवरी अंकित था।
परीक्षा के बीच में ही बोर्ड ने पेपर की तिथि बदलकर 26 फरवरी शाम की पाली निर्धारित कर दी। बोर्ड ने इसके लिए छात्रों के संशोधित एडमिट कार्ड जिला विद्यालय निरीक्षक के परीक्षा कार्यालय को भेजे थे।
लेकिन कई विद्यालयों ने संशोधित एडमिट कार्ड नहीं लिए। ऐसे में छात्रों को इसकी सूचना नहीं मिली और उनकी परीक्षा छूट गई।
जिन छात्रों की परीक्षा छूटी, उनका कहना था कि न तो विभाग की तरफ से जानकारी हुई और न ही कॉलेज की तरफ से तिथि परिवर्तन के बारे में बताया गया।
मामला तूल पकड़ने पर विद्यालयों से सूचना मंगाई गई और बोर्ड को भेजी गई। वहीं दूसरी ओर कुछ छात्र इसे लेकर न्यायालय की शरण में चले गए।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उनके पक्ष में निर्णय दिया और दोषियों पर कार्रवाई का निर्देश दिया। इसके बाद गैरहाजिर छात्रों को उत्तीर्ण अंक दे दिए गए थे।
बोर्ड ने समिति गठित कर लिया फैसला
बोर्ड ने इस संबंध में समिति का गठन किया। 208 में 125 विद्यालयों ने छात्रों संशोधित एडमिट कार्ड समय पर ले लिए थे। जबकि 83 विद्यालयों ने परीक्षा कार्यालय से एडमिट कार्ड नहीं लिए। इनमें से भी आधे विद्यालयों ने अखबारों में छपी खबर के आधार पर छात्रों को परीक्षा दिलाई। समिति द्वारा परीक्षण किए जाने पर जिले के 49 विद्यालयों को दोषी पाया गया जिन्होंने छात्रों को परीक्षा की तिथि बदलने की जानकारी नहीं दी।
भू-राजस्व की भांति रिकवरी कराने के निर्देश
बोर्ड ने प्रधानाचार्यों से अर्थदंड की वसूली भू राजस्व की तरह जिलाधिकारी के माध्यम से कराने का डीआईओएस को निर्देश दिया है। साथ ही विद्यालय के परीक्षा कार्य को देख रहे परीक्षा सहायक को भी जिम्मेदार ठहराया है। उसे तीन वर्षों तक पारिश्रमिक कार्यों से वंचित करने का निर्देश दिया गया है। डीआईओएस डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि सभी विद्यालयों को इसकी जानकारी दे दी गई है। उन्हें चालान के माध्यम से अर्थदंड जमा कराना होगा।