कांग्रेस की रणनीति अंतत: कामयाब हो ही गई। पार्टी के रणनीतिकारों ने जैसा सोचा उसमें वे गुरुवार को पूरी तरह सफल हो गए।
भाजपा व सपा की दो बड़ी रैलियों के बीच कांग्रेस ने भी प्रदेश में अपनी उपस्थिति दर्ज करा दी।
उत्तर प्रदेश में 21 नवंबर का दिन राजनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण था।
प्रदेश में गुरुवार को भाजपा व सपा की दो बड़ी रैलियां थीं। दोनों रैलियों के दिन कांग्रेस ने भी अपना विधानभवन घेराव का कार्यक्रम रखा।
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इसके पीछे कांग्रेसियों की मंशा यही थी कि राजनीतिक गलियारों में केवल भाजपा व सपा ही न छाए रह जाएं।
कांग्रेस भी यह दिखाना चाहती थी कि प्रदेश में वह भी जनता के हितों की रक्षा करने के लिए डटी हुई है।
इसलिए कांग्रेस ने अपना अमोघ अस्त्र खाद्य सुरक्षा बिल प्रदेश में चलाने के लिए विधानभवन घेराव का कार्यक्रम रख लिया।
उत्तर प्रदेश में राहुल की सभाओं में कम भीड़ आने से आहत प्रदेश के वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं ने इस प्रदर्शन को सफल बनाने के लिए जीतोड़ मेहनत कर डाली।
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इसी का नतीजा है कि लखनऊ में काफी समय बाद कांग्रेस का इतना बड़ा प्रदर्शन देखने को मिला।
बिना किसी विरोध के जब कांग्रेसी विधानभवन तक पहुंचे तो उन्हें लगा कि इससे काम नहीं चलने वाला।
इसके बाद कांग्रेसी रणनीतिकारों ने आगे एनेक्सी व मुख्यमंत्री आवास की ओर जाने की योजना बना ली।
कांग्रेसियों को यह पता था कि मुख्यमंत्री आवास तक पुलिस व प्रशासन उन्हें जाने नहीं देगा। इसी को देखते हुए कांग्रेसी आगे बढ़ गए।
कांग्रेसी नेता व कार्यकर्ता बार-बार पुलिस को लाठीचार्ज के लिए उकसाते रहे। अंत में वही हुआ जो कांग्रेसी चाहते थे।
लाठीचार्ज के कारण भाजपा व सपा के साथ ही कांग्रेस ने भी प्रदेश में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
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