सपा ने राज बब्बर को लखनऊ सीट पर अटल बिहारी वाजपेयी के खिलाफ चुनाव में उतारा था
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बॉलीवुड के कई सितारों ने लखनऊ लोकसभा सीट से ताल ठोकी लेकिन उन्हें मुंह की खानी पड़ी। चुनाव प्रचार के दौरान इन सितारों को देखने के लिए भीड़ तो जुटी, लेकिन वोट डालते समय मतदाता उन पर भरोसा नहीं दिखा सके। 1996 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने लखनऊ से अभिनेता राज बब्बर को भाजपा के दिग्गज नेता अटल बिहारी वाजपेयी के मुकाबले चुनाव मैदान में उतारा था।
राज बब्बर की चुनावी सभाओं में जनता तो खूब उमड़ी लेकिन वह वाजपेयी से सवा लाख वोटों से हार गए। 1998 में निर्माता निर्देशक मुजफ्फर अली लखनऊ से सपा के टिकट पर अटल बिहारी वाजपेयी के खिलाफ चुनाव लड़ने उतरे। तब ‘इस शहर में हर शख्स परेशान सा क्यूं है’ वाले पोस्टर छाए रहते थे, लेकिन मुजफ्फर अली भी अटल के सामने नहीं टिक सके।
2009 में मिस इंडिया नफीसा अली लखनऊ से बतौर सपा उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरी थीं। उनकी सभाओं में भीड़ तो खूब उमड़ी, इसके बावजूद वह भाजपा प्रत्याशी लालजी टंडन से हार गईं। आम आदमी पार्टी ने 2014 के लोकसभा चुनाव में मशहूर कॉमेडियन जगदीप के बेटे जावेद जाफरी को लखनऊ के रण में उतारा, लेकिन वह भाजपा प्रत्याशी राजनाथ सिंह के सामने कोई करिश्मा नहीं दिखा सके।
जनता दल से अपना राजनीतिक कॅरिअर शुरू करने वाले राज बब्बर को समाजवादी पार्टी से राज्यसभा में जाने का मौका मिला। वह तीन बार सांसद भी रहे लेकिन बाद में सपा से उनका मोहभंग हो गया। 2008 में उन्होंने कांग्रेस का हाथ थाम लिया और 2009 में कन्नौज लोकसभा सीट से अपने राजनीतिक गुरु मुलायम सिंह यादव की बहू डिम्पल को हराकर चर्चा में आए। हालांकि 2014 में गाजियाबाद से जनरल वीके सिंह ने राज बब्बर को हरा दिया।
नगमा नहीं दिखा सकीं करिश्मा
कांग्रेस ने सिल्वर स्क्रीन की हिट नायिका नगमा को मेरठ से 2014 में मौका दिया था, लेकिन वह कोई करिश्मा नहीं दिखा पाईं। इसके बाद उनका राजनीतिक कॅरिअर भी कुछ खास नहीं चला। भोजपुरी फिल्म स्टार रविकिशन ने पिछले चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर जौनपुर से किस्मत आजमाई लेकिन धराशायी हो गए। वह अब भाजपा में अपना भविष्य तलाश रहे हैं।
भोजपुरी सुपर स्टार मनोज तिवारी ने समाजवादी पार्टी से अपने राजनीतिक कॅरिअर की शुरुआत की थी। 2009 में गोरखपुर से वह चुनाव मैदान में उतरे लेकिन उन्हें योगी आदित्यनाथ के हाथों हार झेलनी पड़ी। इसकेबाद उन्होंने दिल्ली की राह पकड़ ली। दिल्ली के मतदाताओं ने 2014 के लोकसभा चुनाव में मनोज पर भरोसा करते हुए उन्हें संसद पहुंचा दिया।