‘परी.. मैं पढ़ने में खुद को कैसे अच्छा करूं। मैं तो पढ़ाई में बहुत ही
कमजोर हूं।’
ये संवाद एक 10 साल की बच्ची अपनी कल्पना में बनाई गई दोस्त
परी से करती है। खुद को दूसरे बच्चों से कमतर आंकने वाली वही लड़की एक दिन
सबसे अव्वल आकर सबको चौंका देती है।
यह उसकी कल्पना ही थी जो उसे कुछ
ज्यादा कर गुजरने केलिए तैयार कर देती है। फिल्म
डिविजन, भारत सरकार की डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘मेरी परी-मेरी शक्ति’ अलीगंज
स्थित आंचलिक विज्ञान नगरी में दिखाई गई।
ये फिल्म फिल्म डिविजन, सूचना एवं
प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार की मदद से दिखाई गई। हिंदी फिल्म
महोत्सव-2013 के दूसरे दिन दिखाई गई इस फिल्म में केंद्रीय भूमिका में एक
दस साल की लड़की है।
ऐसी बच्ची जो पढ़ाई में कमजोर है लेकिन उसकी
कल्पनाशक्ति बहुत अच्छी है। अपनी कल्पना में ही वह एक परी को दोस्त बना
लेती है। यही परी उसे उसकी ताकत याद दिलाने के साथ पढ़ाई में अच्छा होने का
रास्ता दिखाती है।
कार्यक्रम समन्वयक राममणि त्रिपाठी ने बताया कि ‘मेरी
परी मेरी शक्ति’ के अलावा तीन डॉक्यूमेंट्री ‘संविधान की साक्षी’, ‘राजभाषा
संसदीय समिति’ और ‘हमारी भाषा’ भी दिखाई गई।