पति के खिलाफ झूठे आपराधिक मुकदमे दर्ज कराना मानसिक क्रूरता : हाईकोर्ट
लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने पारिवारिक विवाद के मामले में दिए गए अहम फैसले में कहा कि पत्नी की ओर से पति के खिलाफ झूठे आपराधिक मुकदमे दर्ज कराना मानसिक क्रूरता के समान है। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने लखनऊ की पारिवारिक अदालत से जारी तलाक की डिक्री (फैसले) को उचित करार देकर इसके खिलाफ दाखिल महिला की अपील को खारिज कर दिया।
कोर्ट ने कहा कि महिला ने अपने पति, सास व अन्य ससुरालवालों के खिलाफ झूठा आपराधिक मुकदमा दर्ज कराया, जो उन्हें न सिर्फ मानसिक पीड़ा देने वाला और परेशान करने वाला था बल्कि वैवाहिक कानून के तहत क्रूरता के समान है। न्यायमूर्ति विवेक चौधरी और न्यायमूर्ति ओम प्रकाश शुक्ल की खंडपीठ ने यह फैसला महिला की अपील पर दिया। इसमें उसने पारिवारिक अदालत से जारी तलाक की डिक्री को चुनौती दी थी।
फैसले के मुताबिक वर्ष 2012 में महिला व पुरुष का हिंदू रीतिरिवाज से विवाह हुआ था। दोनों सरकारी सेवा में थे। पीड़ित का कहना था कि विवाह के बाद पत्नी उसके और उसकी माता (सास) के साथ अलग तरह का आचरण करने लगी। उन्होंने पत्नी के मोबाइल पर अनुचित संदेशों को देखा। इससे पता चला कि पत्नी के दफ्तर में कार्यरत एक सहकर्मी के साथ अवैध संबंध थे। समझाने पर उनकी पत्नी अपने प्रेमी के साथ लखनऊ में ही किराये के मकान में रहने लगी।
पीड़ित के अनुसार, वर्ष 2016 में समझा-बुझाकर वह किसी तरह पत्नी को घर लाए। इस पर पत्नी का प्रेमी उन्हें व उनकी माता को धमकाने लगा। पुलिस से शिकायत करने पर पत्नी के प्रेमी ने संबंध होने की बात स्वीकार की। इसी बीच महिला जब ससुराल से जेवर-नकदी लेकर चली गई तो पीड़ित की माता ने इसकी एफआईआर दर्ज करा दी। इसके खिलाफ पीड़ित की पत्नी ने भी एफआईआर दर्ज कराई।
इन तथ्यों के साथ पीड़ित ने पारिवारिक अदालत में तलाक का दावा दाखिल किया। पारिवारिक अदालत ने क्रूरता और काफी समय से अलग रहने के आधार पर तलाक की डिक्री मंजूर कर दी। इसे ही पीड़ित की पत्नी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।