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गोमती में प्रदूषण रोकने के मामले को पीआईएल के रूप में दर्ज करें : हाईकोर्ट

Wed, 10 Mar 2021 10:05 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने राजधानी में गोमती नदी में प्रदूषण रोकने के मामले को जनहित याचिका (पीआईएल) की श्रेणी में अगली वादसूची में सूचीबद्ध करने के निर्देश अपने दफ्तर को दिए हैं। मामले की सुनवाई के समय याची व राज्य सरकार के वकील पेश हुए।
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न्यायमूर्ति ऋतुराज अवस्थी और न्यायमूर्ति मनीष माथुर की खंडपीठ ने यह आदेश सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लखनऊ नाम से वर्ष 2003 से लंबित एक जनहित याचिका पर दिया। इसमें गोमती को प्रदूषण मुक्त करने का मुद्दा उठाया गया था और समय-समय पर कोर्ट ने आदेश जारी किए थे।

मामले में पहले कोर्ट ने शहर में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट व गोमती में सीधे बहने वाले सीवेज को लेकर राज्य सरकार, नगर निगम, जल निगम व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से 22 फरवरी के पहले स्टेटस रिपोर्ट तलब की थी। अदालत ने इन चारों पक्षकारों के वकीलों को हलफनामे पर तीन बिंदुओं पर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए थे। अदालत ने इन चारों पक्षकारों के वकीलों को रिपोर्ट में यह बताने को कहा था कि कितने नाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से जोड़े गए हैं? क्या अब भी बगैर शोधित  सीवेज सीधे गोमती में बहाया जा रहा है? और सीवेज को सीधे गोमती में बहने से रोकने को क्या कदम उठाए गए हैं?
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