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यूपीः अब यहां की सड़कों पर उतर सकेंगे फाइटर प्लेन

Fri, 31 Jul 2015 12:13 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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फाइटर प्लेन उतारने के लिए आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर पांच किमी डिवाइडर रहित सड़क बनाई जाएगी। यही नहीं जिस हिस्से में फाइटर प्लेन लैंडिग व टेक ऑफ करेंगे, उसके किनारे विमानों की पार्किंग की भी व्यवस्था की जाएगी।
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इसके लिए एक्सप्रेस-वे के किनारे अतिरिक्त भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। सुरक्षा कारणों से अभी यह खुलासा नहीं किया जा रहा है कि वायुसेना के विमानों के उड़ान भरने के लिए किस स्थान पर डिवाइडर रहित सड़क बनाई जाएगी, लेकिन लखनऊ से कन्नौज के बीच इसके बनाए जाने के आसार हैं।

गुरुवार को वायुसेना और यूपी एक्सप्रेसवेज इंडस्ट्रियल डवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीडा) के अधिकारियों की बैठक में इस संबंध में सहमति बन गई है। यूपीडा अब वायुसेना के साथ मिलकर एक्सप्रेस-वे के पांच किमी हिस्से का चयन कर उसे हवाई पट्टी के मुताबिक विकसित करेगा।
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करीब 302 किमी. लंबे आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर लड़ाकू विमान उतारने की योजना रफ्तार पकड़ने लगी है। एयर ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ मुख्यालय सेंट्रल एयर कमांड एयर मार्शल राजेश इस्सर व यूपीडा के सीईओ नवनीत सहगल व अन्य अधिकारियों के साथ बैठक में इस संबंध में विचार-विमर्श किया गया।

एक्सप्रेस-वे पर हवाई पट्टी बनाने का प्रस्ताव

सूत्रों के मुताबिक पहले वायुसेना के विमानों को उतारने के लिए फोल्डेबल डिवाइडर बनाने का प्रस्ताव था लेकिन अब तय किया गया है कि विमानों को उतारने के लिए चिह्नित एक्सप्रेस-वे के पांच किमी. के हिस्से में डिवाइडर रहित सड़क बनाई जाएगी जिससे विमानों की लैडिंग व टेक ऑफ में किसी तरह की कठिनाई न हो।

बैठक में विमानों की लैंडिंग के लिए लखनऊ के नजदीक ही एक्सप्रेस-वे पर हवाई पट्टी बनाने का प्रस्ताव है। बताते हैं कि वायुसेना ने स्थान चिह्नित कर लिया है पर सुरक्षा कारणों से अभी स्थान गोपनीय रखा जा रहा है।
 
सूत्रों का कहना है कि जिस हिस्से में डिवाइडर रहित सड़क बनाई जाएगी उसके किनारे विमानों की पार्किंग का भी इंतजाम किया जाएगा।

अगले साल से रफ्तार पकड़ेगा लखनऊ-आजमगढ़-बलिया एक्सप्रेस-वे

आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे के बाद अब लखनऊ-आजमगढ़-बलिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे को रफ्तार देने की कवायद तेज कर दी गई है। अगले साल से इस एक्सप्रेस-वे का काम शुरू कराने की तैयारी है।

लगभग 15000 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस एक्सप्रेस-वे में निवेश के लिए कई विदेशी कंपनियों से संपर्क साधा गया है। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं से भी मदद की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।
 
इस परियोजना के लिए आईआईडीसी लि. को कंसल्टेंट चुना गया है। कैबिनेट की मंजूरी मिलते ही औपचारिक रूप से कंसल्टेंट की नियुक्ति करके परियोजना की डीपीआर तैयार कराने की कार्यवाही शुरू की जाएगी।

लखनऊ से आजमगढ़ होते हुए बलिया तक प्रवेश नियंत्रित ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे के निर्माण की फिजिबिलिटी स्टडी कराने के लिए कंसल्टेंट चयन के बाद अब इस परियोजना के लिए संसाधन जुटाने की मुहिम तेज कर दी गई है।
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380 किमी लंबा होगा एक्सप्रेस-वे

कैबिनेट की अगली बैठक में आईआईडीसी लि. को बतौर कंसल्टेंट नियुक्त करने का प्रस्ताव रखा जाएगा। यूपीडा द्वारा इस एक्सप्रेस-वे को इंजीनियरिंग प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शंस (ईपीसी) मोड पर बनवाने का फैसला किया गया है।

यूपीडा के सीईओ नवनीत सहगल के मुताबिक इस परियोजना को अमलीजामा पहनाने के लिए आबूधाबी इन्वेस्टमेंट बोर्ड, चीन के लियोनलिन प्रांत की एक निजी कंपनी तथा एशियन डवलपमेंट बोर्ड से वित्तीय मदद लेने के लिए बातचीत चल रही है।

अगर वित्तीय मदद नहीं मिलती है तो भी अगले साल से राज्य सरकार अपने संसाधनों से काम शुरू कराएगी। उन्होंने बताया कि जल्द ही कंसल्टेंट की नियुक्ति कर दी जाएगी जो फिजिबलिटी रिपोर्ट तैयार कराने के साथ-साथ डीपीआर भी तैयार करेगा।

अगले छह महीने में सारी कार्यवाही पूरी कराई जाएगी। एक्सप्रेस-वे लगभग 380 किलोमीटर लंबा होगा। यूपीडा द्वारा कराए गए आकलन के अनुसार इसके निर्माण पर लगभग 30 करोड़ रुपये प्रति किमी लागत आने का अनुमान है। वहीं जमीन अधिग्रहण पर लगभग 3000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
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