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कैप्टन मीनाक्षी भंडारी की सदिग्ध हालत में हुई मौत पर 50 लाख रुपए हर्जाना

Thu, 12 Oct 2017 12:05 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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सशस्त्र सैन्य बल अधिकरण (एएफटी) की लखनऊ पीठ ने एक अहम फैसले में कैप्टन मीनाक्षी भंडारी की संदिग्ध हालात में मौत मामले में सख्त रुख अख्तियार किया है।
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पीठ ने केंद्र सरकार, चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ समेत 11 पक्षकारों पर 50 लाख रुपये का हर्जाना लगाया है।

एएफटी ने कहा है कि हर्जाने की यह रकम चार महीने में उसके पास जमा कराई जाए जो कैप्टन भंडारी के पिता को दी जाएगी।

एएफटी के न्यायिक सदस्य जस्टिस देवी प्रसाद सिंह और प्रशासनिक सदस्य एयर मार्शल अनिल चोपड़ा की खंडपीठ ने यह आदेश कैप्टन मीनाक्षी के पिता देहरादून निवासी देवेंद्र सिंह भंडारी की याचिका मंजूर करते हुए दिया।

एएफटी ने कहा कि पहली नजर में कैप्टन मीनाक्षी की मौत हादसा नहीं लगता। उनके घुटने के नीचे जलने के निशान नहीं थे, जबकि सिर से घुटने तक पूरा शरीर कोयला हो चुका था।
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यह संकेत देता है कि उनके ऊपर ज्वलनशील पदार्थ डालकर किसी दूसरे व्यक्ति ने जलाया। इससे पहले याची ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपनी बेटी की मौत के मामले में याचिका दायर की थी।

दिल्ली हाईकोर्ट ने 16 अप्रैल 2015 को याचिका को इस छूट के साथ खारिज कर दिया था कि याची एएफटी लखनऊ के समक्ष अपनी व्यथा रख सकता है।

एएफटी ने पक्षकारों को यह भी निर्देश दिया कि कैप्टन मीनाक्षी की मौत की नए सिरे से जांच करवाएं और दोषियों को दंडित करवाएं।

साथ ही यह भी कहा कि रक्षा मंत्रालय केलिए यह मुनासिब होगा कि वह इस मामले की तफ्तीश किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी के सुपुर्द करे। इससे हकीकत सामने आ सकेगी।

एएफटी ने भारतीय वायु सेना को भी यह छूट दी है कि वह कानून के अनुसार इस मामले की जांच नए सिरे से उच्चस्तरीय समिति से करवा सकती है।

पक्षकारों को यह भी निर्देश दिया गया है कि कैप्टन मीनाक्षी की मौत से संबंधित मामले में उनकी पारिवारिक पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य लाभ जिसकी वे हकदार थीं, वे परिवार को दिए जाएं।
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क्या है मामला

एयरफोर्स हॉस्पिटल जैसलमेर में तैनात कैप्टन मीनाक्षी भंडारी की पुणे में इलाज के दौरान वर्ष 2011 में मौत हो गई थी। उन्हें करीब 90 प्रतिशत जली हालत में जोधपुर से पुणे के कमांड अस्पताल ले जाया गया था। सैन्य प्रशासन की ओर से मीनाक्षी की मौत को हीटर से जलने से हुई दुर्घटना बताया गया। जबकि पिता ने बेटी की मौत पर सवाल उठाते हुए एएफटी की शरण ली थी।
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