ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय के पांचवें दीक्षांत समारोह में मेडल पाने वाले मेध?
लखनऊ। प्रख्यात लेखक व कवि पद्मश्री प्रो. अशोक चक्रधर ने कहा कि हमारी भाषा काफी समृद्ध है। यदि हम अपनी भाषाओं का मिलन करा दें तो किसी भी शब्द के बहुत विकल्प मिल जाएंगे। उन्होंने भाषा के प्रौद्योगिकी के साथ गठजोड़ पर बल देते हुए कहा कि इससे बड़ा बदलाव आएगा। वह सोमवार को ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय के पांचवें दीक्षांत समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि भाषा संस्कृति की वाहक होती है। भाषा विज्ञानियों को इस विश्वविद्यालय पर भरोसा करना होगा। यहां भाषाओं का जो मिलन स्थल बना है वह अद्भुत है। उन्होंने विवि प्रशासन के सामने अपने तीन सपनों का उल्लेख करते हुए कहा कि डिजिटल भारत के इस युग में भाषा विवि शब्दों का मानकीकरण करे। हमारी पांडुलिपियां व ग्रंथ काफी दुर्लभ हैं। उनका डिजिटाइजेशन करने का बहुत लाभ होगा। अंग्रेजी की दादागिरी के इस दौर में हमें हिंदी को वैश्विक स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए नेशनल एंड इंटरनेशनल नॉलेज एक्रीडिएशन स्टैंडर्ड फॉर हिंदी ‘निकष’ की स्थापना करनी होगी। इतना ही नहीं जिस तरह ‘एलेक्सा’ काम करता है, उसी तरह हमें ‘इमली’ विकसित करनी होगी।
हमें इंटरनेट पर हिंदी के कंटेंट अपलोड करने की व्यवस्था करनी होगी। ताकि कोई भी इसे आसानी से खोज सके। इस तरह यहां के विद्यार्थी भाषा विज्ञानी बनकर देश भर में नाम कमाएंगे। उन्होंने कहा कि भाषाओं के लुप्त होने का दोष लोग भूमंडलीकरण और कंप्यूटर को देते हैं, लेकिन कंप्यूटर ऐसा माध्यम है, जिससे विलुप्त हो रही भाषाओं को सहेजा जा सकता है। समारोह की अध्यक्षता राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने की और विशिष्ट अतिथि उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा थे। कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने सभी का स्वागत और रजिस्ट्रार अशोक कुमार अरविंद ने धन्यवाद ज्ञापित किया। संचालन डॉ. नीरज शुक्ला ने किया।
चक्रधर बने ऑनरेरी प्रोफेसर
दीक्षांत समारोह में प्रो. अशोक चक्रधर को सुनकर प्रभावित राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने उनसे भाषा के क्षेत्र में काम करने के लिए विवि का मार्गदर्शन करने को कहा। वहीं कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने बताया कि प्रो. चक्रधर ने बतौर ऑनरेरी प्रोफेसर विवि में काम करने की सहमति दी है। वे विश्वविद्यालय में ऑनलाइन क्लास लेंगे। दीक्षांत समारोह में राज्यपाल ने प्रो. चक्रधर को डीलिट की मानद उपाधि प्रदान की।