लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के सर्जिकल आंकोलॉजी विभाग के डॉ. नसीम अख्तर के मुताबिक आंत का कैंसर जीवनशैली से भी जुड़ा है। रेशेदार फल व हरी सब्जी के सेवन से इसका खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है। डॉ. नसीम शनिवार को केजीएमयू के शताब्दी भवन-2 में कैंसर जागरूकता कार्यक्रम में बोल रहे थे।
डॉ. नसीम ने कहा, अगर किसी को मल के साथ खून आ रहा है तो इसे पाइल्स ही नहीं समझना चाहिए। ये लक्षण आंत के कैंसर के भी सकते हैं। इसलिए तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। इससे समय रहते कैंसर का इलाज शुरू किया जा सकता है। कैंसर से बचने के लिए फास्ट फूड व धूम्रपान से बचना चाहिए।
पर्याप्त मात्रा में साफ पानी पीने से भी कैंसर का खतरा कम रहता है। सर्जिकल आंकोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ. विजय कुमार ने कहा, कई बार मरीजों को मल के लिए बैग लगाना पड़ता है। इससे घबराने की जरूरत नहीं है। कई बार यह अस्थायी होता है।
डॉ. शिव राजन ने कहा, कैंसर को हराने के लिए जागरूकता की जरूरत है। नई दवाओं व ऑपरेशन की तकनीक से इलाज संभव है। रेडियोथेरेपी विभाग के डॉ. सुधीर सिंह ने कहा, कैंसर मरीजों के इलाज के लिए कई सरकारी योजनाएं हैं। इनसे गरीब मरीजों का भी इलाज संभव हो पा रहा है।
एक मिनट की जांच से कैंसर की पहचान
केजीएमयू में गैस्ट्रो मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. सुमित रूंगटा ने कहा, आंतों की बीमारी का पता लगाने में कोलोनोस्कोपी बेहद अहम है। इसमें सिर्फ एक मिनट में ही कैंसर की पहचान हो जाती है।
धैर्य बनाएं रखें संभव है इलाज
जागरूकता कार्यक्रम के दौरान रेहाना, गुरुनाम, सुशील, कृपाशंकर जैसे कैंसर को मात देने वाले कई मरीज उपस्थित रहे। इनके मुताबिक शुरुआत में कैंसर का नाम सुनकर डर लगा, लेकिन इलाज की शुरुआत करने के बाद उनका डर जाता रहा। डॉक्टरों ने भी हौसला बढ़ाया। अब वे पूरी तरह से ठीक हो चुके हैं और सामान्य जीवन जी रहे हैं।