प्रदेश में करीब 10 जिलों में पिछले माह संक्रामक बीमारियां फैल गई थीं। उल्टी, दस्त के साथ ही बुखार पीडितों की संख्या बढ़ी थी। फर्रुखाबाद, बांदा, बलिया, कन्नौज सहित 10 जिलों में बच्चों को उच्च चिकित्सा सेंटर पर भर्ती कराना पड़ा था। जांच के दौरान कहीं डिप्थीरिया तो कहीं मलेरिया की पुष्टि हुई थी।
उत्तर प्रदेश के कई जिलों में बुखार फैल गया है। इसकी चपेट में ज्यादातर बच्चे हैं। स्वास्थ्य महानिदेशक ने मुख्य चिकित्साधिकारिरयों को जेई, एईएस को लेकर सतर्क रहने और दवाओं का इंतजाम रखने का निर्देश दिया है। जिन इलाकों में बच्चों के बीमार होने की संख्या अधिक है, वहां टीमें भेजी जा रही हैं। यह टीमें वहां की व्यवस्था और बीमारी की वजह जाचेंगी।
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प्रदेश में करीब 10 जिलों में पिछले माह संक्रामक बीमारियां फैल गई थीं। उल्टी, दस्त के साथ ही बुखार पीडितों की संख्या बढ़ी थी। फर्रुखाबाद, बांदा, बलिया, कन्नौज सहित 10 जिलों में बच्चों को उच्च चिकित्सा सेंटर पर भर्ती कराना पड़ा था। जांच के दौरान कहीं डिप्थीरिया तो कहीं मलेरिया की पुष्टि हुई थी। अब एक बार फिर बुखार पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ने लगी है।
बरेली में एक बच्ची जापानी इंसेफेलाइटिस की चपेट में आ गई हैं। यहां दो स्वाइन फ्लू के भी मरीज मिल चुके हैं। इसी तरह महराजगंज, जौनपुर, उन्नाव, मिर्जापुर सहित करीब15 जिलों में बुखार से लोग पीड़ित हैं। इसमें ज्यादातर बच्चे हैं। स्वास्थ्य महानिदेशक डा. लिली सिंह ने सभी मुख्य चिकित्साधिकारियों को बुखार के हर मरीज की जांच कराने का निर्देश दिया है। जांच में जिस बीमारी की पुष्टि हो, उसका प्रसार न होने पाए, इसलिए संबंधित इलाके में विस्तृत बचाव कार्य चलाया जाए। उन्होंने अस्पतालों में दवाओं की व्यवस्था करने, जेई और एईएस पीड़ितों के उपचार के लिए बने वार्ड को दुरुष्त करने का निर्देश दिया है। यह भी कहा है कि जहां दवा अथवा अन्य सामग्री कम हो, उसका तत्काल इंतजाम किया जाए। जहां भी डिप्थीरिया, जेई, एईएस आदि के लक्षण मिले, उनके बारे में तत्काल प्रदेश मुख्यालय को सूचना देने का भी निर्देश दिया है।